स्वारघाट में रात को छोड़े जा रहे लावारिस पशु

स्वारघाट—उपमंडल स्वारघाट में रात के अंधेरे में अज्ञात लोगों द्वारा पशु छोड़े जा रहे है, जिसके चलते स्वारघाट क्षेत्र में दिन-प्रतिदिन लावारिस पशुओं में बढ़ोतरी हो रही है। बता दें कि राष्ट्रीय उच्च मार्ग चंडीगढ़-मनाली-205 पर कई जगहों पर आवारा पशुओं का जमघट लगा रहता  है। लावारिस पशुओं में अधिकतर सांड और गउएं हैं, जिनको भगाने पर वे मारने को पीछे दौड़ते हैं। लावारिसा पशुओं की वजह से जहां एनएच पर जाम लगता है और हादसों का ग्राफ बढ़ रहा है, वहीं दूसरी और ये लावारिस रूप से छोड़े गए पशु क्षेत्र के किसानों के लिए भी मुसीबत बने हुए है। ये लावारिश पशु किसानों की फसलों को चट कर रहे है। बता दें कि साल 2012 की पशुगणना के अनुसार जिला में 1560 लावारिश पशु हैं, परंतु अगर आज की बात की जाए तो जिला में लावारिश पशुओं की संख्या पांच से दस गुना हो चुकी है। हालांकि लावारिस पशुओं की संख्या पर अंकुश लगाने के लिए सरकार द्वारा पशु पंजीकरण योजना चलाई थी, जिसके तहत घर-घर जाकर पशुओं का पंजीकरण किया गया था और पशुओं को टैग लगाए गए थे, लेकिन यह योजना भी सफल नहीं हो पाई है। इसके अतिरिक्त प्रदेश उच्च न्यायालय ने प्रदेश की सभी सड़कों से लावारिस पशुओं को मुक्त कराने का निर्णय लिया था और सरकार को पंचायतों में गोसदन बनाने के दिशा-निर्देश  दिए थे। इन आदेशों के तहत लावारिश पशुओं को आश्रय देने के उद्देश्य से स्वारघाट की टाली-जकातखाना पंचायत में गौसदन बनाया जा रहा है, लेकिन अभी तक इसका निर्माण कार्य पूर्ण नहीं हो पाया है।

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