स्वास्थ्य सेवाएं जिम्मेदार

– राजेश कुमार चौहान

बिहार में चमकी नामक दिमागी बुखार ने सैकड़ों बच्चों को मौत की नींद सुला दिया, यह बहुत ही शर्मनाक और निंदनीय है। क्या हमारे देश में ऐसी चिकित्सा पद्धति अभी तक नहीं है, जो दिमागी बुखार के कारणों को फैलने और बच्चों की जान बचा सके, जबकि हमारा देश तो आयुर्वेद प्रधान देश है। किसी देश की संपन्नता का जीडीपी और शेयर के आंकड़ों से पता नहीं चलता, बल्कि वहां के नगारिकों की शिक्षा, स्वास्थ्य, भोजन जैसी मूलभूत सुविधाओं की पहुंच से चलता है। बिहार में दिमागी बुखार से बच्चों की मौत यह भी दर्शाती है कि हमारे देश में सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं बहुत ही लचर हाल में हैं।

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