हरी घास में ग्लव्स पहनकर ही जाएं

 श्मिला  —स्क्रब टायफस पर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट जारी कर दिया है। सोमवार को आयोजित बैठक में स्वास्थ्य निदेशक द्वारा इस संबंध में गाइडलाइन जारी की गई है, जिसमें जनता को हरे घास से सीधे संपर्क में आने से मनाही की गई है। गौर हो कि शनिवार को इस सीज़न का पहला स्क्रब टायफस का मामला सामने आया है। मंडी से रैफर किए गए युवक को आईजीएमसी में स्क्रब होेने की पुष्टि हुई है, जिसको लेकर अलर्ट जारी करने के लिए कहा गया  है। गाइडलाइन में कहा गया है कि घास में पनपने वाले पिस्सू से स्क्रब टायफस होता है। गौर हो कि पिछले वर्ष भी लगभग 20 लोगों की मौत का कारण स्क्रब टायफस बना था। इस बीमारी के लक्ष्णों में पहले काफी तेज़ बुखार होता है, जो सामान्य दवा से नहीं उतरता है। यह 102 डिग्री से शुरू होता है। लिहाज़ा जनता को हरे घास से दूर रहना चाहिए। विशेषकर किसान-बागबानों को कहा गया है कि वे हरे घास में संपर्क  में आने से पहले ग्लव्स जरूर पहनें। उधर, आईजीएमसी प्रशासन का कहना है कि जनता को भी इस ओर सतर्क रहना चाहिए और इस बीमारी के लक्ष्ण दिखने पर अस्पताल आने में देर नहीं करनी चाहिए। जानकारी के मुताबिक जो सबसे पहला व्यक्ति स्क्रब टायफस की चपेट में आया है, उसने पहले मंडी मेडिकल कालेज में चैक करवाया था, लेकिन वहां उसमें स्क्रब की पुष्टि नहीं हो पाई थी। लिहाज़ा अब अन्य मेडिकल कालेजों को भी सतर्क रहना होगा। तेज बुखार नहीं उतरने को लेकर मंडी से आईजीएमसी को केस रैफर करने के बाद अब अस्पताल ने प्रभावित व्यक्ति के स्क्रब टायफस पॉजिटिव होने के  बारे में बताया है। प्रभावित पीलिया से भी ग्रसित था। तेज़ बुखार के कारण उसका स्क्रब टेस्ट लिया गया था।

आईजीएसमी को मिले हैें 40 लाख

स्क्रब टायफस को लेकर प्रदेश सरकार ने आईजीएमसी को 40 लाख रुपए पिछले सप्ताह जारी कर दिए थे। इससे आईजीएमसी प्रशासन ने समय रहते दवाआें की खरीद और टेस्ट किट की खरीददारी शुरू कर दी है। स्क्रब होने के बाद अस्पताल में मरीज़ के अन्य टेस्ट भी किए जाएंगे, जो अस्पताल में सरकार की फ्री टेस्ट पॉलिसी के तहत होंगे।

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