हिमाचल प्रदेश के बच्चे कर रहे सबसे ज्यादा खेत मजदूरी

चंडीगढ़ – भारत में चाइल्ड लेबर करने वाले हर दस बच्चों में से छह बच्चे खेतों में मजदूरी करते हैं। इन बच्चों का सबसे ज्यादा आंकड़ा हिमाचल प्रदेश के बच्चों का है, जहां 86.33 फीसदी बच्चे खेत मजदूरी करते है। यह आंकड़े ‘बाल मजदूरी निषेध दिवस’ को लेकर  चाइल्ड राइट्स एंड यू (क्राई) संस्था ने जारी किए और इस वास्तविकता पर रोशनी डालते हुए बच्चों को स्कूल भेजने का आह्वान किया। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि भारत में बाल मजदूरी करने वाले ज्यादातर बच्चे किसी फैक्टरी या वर्कशॉप में काम नहीं करते, न ही वे शहरी क्षेत्रों में घरेलू नौकर या गलियों में सामान बेचने का काम करते हैं। सबसे ज्यादा बच्चे खेतों में काम करते हैं, जहां वह फसलों की बुवाई, कटाई, फसलों पर कीटनाशक छिड़कना, खाद डालना, पशुओं और पौधों की देखभल करना जैसे काम करते हैं। क्राई के अनुसार वर्ष 2016 में जारी 2011 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार देश में 18 वर्ष से कम उम्र के 62.30 फीसदी बच्चे खेती या इससे जुड़े अन्य व्यवसायों में काम करते हैं। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन जारी आंकड़ों के अनुसार भारत में लगभग 152  मिलियन बच्चे बाल मजदूरी करते हैं और मजदूरी करने वाले हर 10 में से सात बच्चे खेती का काम करते हैं। भारत के कुछ राज्यों में हालांकि ये आंकड़े भारतीय औसत की तुलना में अधिक हैं। हिमाचल प्रदेश में खेती करने वाले बच्चों की संख्या सबसे अधिक 86.33 फीसदी है। इसी तरह से छत्तीसगढ़ और नागालैंड में यह क्रमश 85.09 फीसदी एवं 80.14 फीसदी है। बड़े राज्यों की बात करें, तो मध्यप्रदेश में यह संख्या 78.36 फीसदी, राजस्थान में 74.69 फीसदी, बिहार में 72.35 फीसदी, उड़ीसा में 69 फीसदी और असाम में 62.42 फीसदी है।

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