हिमाचल में कम्प्यूटर भी ‘बोलेगा’ पहाड़ी

शिमला  —हिमाचल में पहाड़ी बोली को मजबूत करने के लिए अब हिंदी-पहाड़ी सॉफ्टवेयर बनाया जाएगा। पहली बार भाषा अकादमी एक ऐसे काम को करने जा रहा है, जिसमें हिमाचल की संस्कृति को नए आयाम मिल सकते हैं। बताया जा रहा है कि इस तकनीक को बनाने के लिए हिमाचली भाषा में अनुवादित वाक्यों में व्याकरण तथा भाषा विज्ञान की संरचना का विवरण तैयार किया जाएगा। इसके बाद एनआईटी हमीरपुर द्वारा एक सॉफ्टवेयर बनाया जाएगा। हालांकि इसको लेकर भाषा अकादमी द्वारा कुछ अहम प्रयास भी शुरू किए गए हैं, जिसमें खासतौर पर अभी हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी, शिमला द्वारा राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान हमीरपुर के सहयोग से 22 से 23 जून तक संस्कृति सदन, सलासी हमीरपुर में हिंदी-पहाड़ी अनुवाद कार्यशाला का आयोजन किया गया है। इस कार्यशाला के दौरान हिंदी-पहाड़ी डिजिटल अनुवाद का सॉफ्टवेयर तैयार करने के लिए प्रथम चरण में हिंदी के लगभग दो हजार वाक्यों का कांगड़ी में अनुवाद भी कर दिया गया है। इसके बाद दूसरे चरण अब सॉफ्टवेयर का निर्माण किया जाने वाला है। जानकारी के मुताबिक हिंदी-हिमाचली के लिए कांगड़ा, हमीरपुर, चंबा, बिलासपुर और मंडी जनपद की बोलियों का डाटा इकट्ठा किया जा रहा है। इसमें अभी तक एनआईटी द्वारा अंग्रेजी भाषा पर आधारित लगभग 10 हजार वाक्य हिंदी अनुवाद सहित उपलब्ध करवाए जा रहे हैं, जिनके साथ हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा, चंबा, हमीरपुर, मंडी तथा बिलासपुर की लोक संस्कृति, कला, इतिहास, भाषा-साहित्य, कृषि, खेलकूद, संस्कार, लोक जीवन, प्रशासन तथा सामान्य जीवन व्यवहार के संवादों पर आधारित वाक्य भी हिंदी तथा हिमाचली अनुवाद सहित शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि डिजिटल अनुवाद के लिए हिमाचल के लोकजीवन एवं संस्कृति से संबंधित भाषा डाटा तैयार किया जा सके।

क्या कहते हैं भाषा अकादमी सचिव

भाषा अकादमी के सचिव डा. कर्म सिंह का कहना है कि हिंदी-पहाड़ी अनुवाद सॉफ्टवेयर पर काम किया जा रहा है। अभी जो कार्यशाला आयोजित की गई है, उसमें एनआईटी से डा. श्वेता, शैली तथा पहाड़ी अनुवादक एवं विशेषज्ञ के तौर पर विनोद कुमार भावुक, डा. विजय पुरी, हरिकृष्ण मुरारी, देवराज संसालवी, शक्ति चंद राणा, ओम प्रकाश प्रभाकर, सोनिया पखरोलवी आदि शामिल हुए तथा देवराज शर्मा अकादमी के पुस्तकाल्याध्यक्ष कार्यशाला में भाग ले चुके हैं।

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