25 गांवों के लोग बने खुनेवड़-सुतेवड़ी परंपरा के साक्षी

संगड़ाह—उपमंडल संगड़ाह के साथ लगते शिमला जिला के कुपवी इलाके के हीड़ा-भेलावण गांव में आयोजित ठारी माता शांत अनुष्ठान रविवार को सशस्त्र प्रदर्शन तथा बुरी शक्तियों को गांव से बाहर निकालकर संपन्न हुआ। मां दुर्गा का स्वरूप समझी जाने वाली ठारी माता के गुर के निर्देशानुसार विसर्जन समारोह के दौरान बुरी शक्तियों को गांव से निकालकर हेड़ा गांव के बाहर सुतेवड़ी कहलाने वाली रक्षा डोर बांध दी गई है। इस दौरान मौजूद 25 गांव के लोगों द्वारा डांगरा, तलवार व धनुष-बाण आदि अस्त्र शस्त्र के साथ शक्ति प्रदर्शन भी किया गया। ठारी माता के विशेष शांत अनुष्ठान के लिए 35 साल बाद सिरमौर व शिमला जिला के 25 गांव के पाशी खेमे के लोग शुक्रवार को हीड़ा गांव पहुंचे थे तथा रविवार को सभी अपने गांवों के लिए वापस रवाना हुए। इस अनुष्ठान में शामिल दस हजार के करीब सनपालटा समुदाय के लोगों ने इस दौरान बिरादरी की बेहतरी, सामाजिक कुरीतियां त्यागने तथा अपनी लोक संस्कृति के संरक्षण की भी शपथ ली। हीड़ा-भेलावण गांव को अपना मूल निवास स्थान बताने वाले जिला सिरमौर के उपमंडल संगड़ाह, नाहन व शिलाई के अंतर्गत आने वाले गांव घाटों, गनोग, देवना, बांदल, द्राबिल, भेनू, शिरीक्यारी व नैनीधार आदि के सैकड़ों लोगों सहित मेजवान शिमला जिला के दर्जन भर से अधिक गांव के लोग भी ठारी महायज्ञ में शामिल हुए। पारंपरिक वाद्य यंत्र दमेनू, शहनाई, ढोल व नगाड़े तथा डांगरा, तलवार व धनुष-बाण जैसे अस्त्र-शस्त्रों के साथ पाशी खेमे के लोगों द्वारा तीन दिवसीय इस आयोजन के दौरान बिशु अथवा हाका नृत्य भी किया गया। कुल देवताओं का आशीर्वाद लेने के लिए सदियों से ग्रेटर सिरमौर व शिमला में इस तरह के अनुष्ठानों के दौरान अपना प्रभुत्व बनाए रखने के लिए शाठी व पाशी खेमे के लोगों द्वारा शक्ति प्रदर्शन भी किए जाते हैं। अनुष्ठान में आम लोगों के अलावा 25 गांव के कई जनप्रतिनिधि अथवा नेता व बड़े अधिकारी जैसे कई गणमान्य व्यक्ति भी शरीक हुए।

 

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