2663 ने अपनाई, अब 50 हजार पर नजरें गढ़ाई

रासायनिक-जैविक को छोड़ प्राकृतिक खेती से जुड़ रहे प्रदेश भर के किसान

पालमपुर – रसायनिक व जैविक के बाद अब प्रदेश के किसानों को प्राकृतिक खेती का विकल्प मिला है। किसान प्राकृतिक खेती को अपना रहे हैं और प्राकृतिक खेती से जुड़ रहे किसानों की संख्या को देख जीरो बजट नैचुरल खेती से जुड़े लोग भी प्रोत्साहित हो रहे हैं। गत वर्ष पांच सौ किसानों तक प्राकृतिक खेती को पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जबकि 2663 किसान इस ओर अग्रसर हुए। यहीं से वैज्ञानिकों व अधिकारियों का जोश भी दोगुना हुआ और किसानों की आय दोगुना करने के लिए अब इस साल 50 हजार किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इसी कड़ी में प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना के तहत सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती पर प्रदेश स्तरीय छह दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन 5 से 10 जून तक प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय में किया जा रहा है। इसका उद्घाटन राज्यपाल आचार्य देवव्रत करेंगे व कृषि मंत्री रामलाल मार्कंडेय भी मौजूद रहेंगे। जीरो बजट नैचुरल खेती के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डा. राजेश्वर चंदेल ने बताया कि जीरो बजट प्राकृतिक खेती पर दो शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। पहला शिविर पांच जून से कृषि विवि में और दूसरा 28 जून से सोलन में होगा। प्रदेश कृषि विवि में आयोजित किए जा रहे शिविर में प्रदेश के छह जिलों से 850 से अधिक किसान तथा कृषि, बागबानी व आत्मा परियोजना से दो सौ से ज्यादा अधिकारी शिरकत करेंगे।

देवभूमि में बदलेगी कृषि की परिभाषा

प्रदेश कृषि विवि में आयोजित किए जा रहे शिविर में शिरकत करने पहुंचे पद्मश्री सुभाष पालेकर के अनुसार अब देवभूमि में भी कृषि की परिभाषा बदलनी होगी। रासायनिक और जैविक खेती से जहर डाला जा रहा है। जैविक खेती में वर्मीकंपोस्ट में खतरनाक तत्त्व होते हैं। कैंसर शुगर हार्ट अटैक के मामले बढ़ रहे हैं और बच्चे भी गिरफ्त में आ रहे हैं। रासायनिक खेती से भूमि बंजर हो रही है। रासायनिक या जैविक नहीं सुभाष पालेकर नैचुरल फार्मिंग को अपनाना होगा।

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