70 साल से अपने वजूद की जंग लड़ रहा देहरा अस्पताल

विधानसभा क्षेत्र के पास नहीं अपना मेडिकल ब्लॉक, मरीज आए दिन दिक्कतें झेलने को मजबूर

देहरा गोपीपुर -सात दशकों से देहरा विस क्षेत्र का अस्पताल अपने वर्चस्व की जंग लड़ रहा है।  अहम बात तो यह है कि यहां पर देहरा कोई नहीं तेरा का यह वाकय सही होता नजर आ रहा है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक 70 के दशक से 2002 तक सिविल अस्पताल की डीडीओ पावर सीएमओ कांगड़ा के अधीन ही रही। 2002 से डीडीओ पावर एसएमओ देहरा के पास तो आ गई, पर मेडिकल ब्लॉक फिर भी नहीं बन पाया। यहां बता दें कि मौजूदा दौर में देहरा सिविल अस्पताल 100 बिस्तर होने के बाद भी सात दशकों से बीएमओ मेडिकल ब्लॉक की राह ताक रहा है। अब इसे देहरा का दुर्भाग्य कहे या जनता के  द्वारा चुनकर विस भेजे जनप्रतिनिधियों की नाकामी, यह बड़ा प्रश्न है, जिसका जबाव जनता को अभी तक नहीं मिल पाया। यहां  बता दें कि मौजूदा दौर में देहरा अस्पताल तीन बीएमओ के अधीन आता है, जिसमें देहरा, जवालाजी और डाडासीबा ब्लॉक शामिल है। अब यहां हरिपुर, गटुथर, सीएचसी, पीएचसी भटोली पकोरियां, पीएससी बनखंडी पीएचसी दरकाटा का ज्वालामुखी ब्लॉक आता है, जबकि  देहरा की 13 पंचायतें नगरोटा सुरियां ब्लॉक के तहत आती है,  तो वहीं सुनेहत, नलेटी, नैहरनपुखर, घियोरी, बरवाढा बढ़लठोर, जंबलबसी और चनौर का ब्लॉक डाडासीबा के तहत पड़ता है। चौंकाने वाली बात तो यह है कि तीनों ब्लाकों से देहरा अस्पताल में मरीज चेकअप के लिए आते हैं, लेकिन देहरा अस्पताल का खुद का मेडिकल ब्लॉक न होने के कारण स्वास्थ्य सुविधाओं में मिलने वाली सहायता राशि को लेने के लिए उक्त  सभी पंचायतों के मरीजों और उनके तीमारदारों को तीनों ब्लाकों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिसके कारण स्वास्थ्य कर्मचारियों को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, क्योंकि कर्मचारियों के समक्ष सबसे बड़ी दिक्कत यह होती है कि कौन सा मरीज और तीमारदार किस ब्लॉक का है। कई मर्तबा तो एक ही मरीज को विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं  के तहत मिलने वाली राशि के लिए कई चक्कर लगाने पड़ जाते हैं।

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