80 लाख खर्चे… पर मंदिर में टपक रहा पानी

रामपुर बुशहर—रामपुर ही नहीं बल्कि बाहरी राज्यों की आस्था का प्रतीक श्राईकोटी मंदिर अनदेखी का शिकार हो रहा है। इस मंदिर के जीर्णोद्वार पर करीब 80 लाख तक की राशि खर्च हो चुकी है। लेकिन अभी भी मंदिर का जीर्णोद्वार अधूरा पड़ा है। यहां तक कि मंदिर के बीचोंबीच पानी टपक रहा है। वहीं छत न लगने से भीतर लगी लकडि़यां सड़ने के कगार पर है। ऐसे में आधे अधूरे जीर्णोद्वार से ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। ये मंदिर भीमाकाली मंदिर ट्रस्ट के अधीन आता है। ग्रामीणों का आरोप है कि ट्रस्ट प्रबंधन भी इस मंदिर की कोई सुध नहीं ले रहा है। जबकि मंदिर के जीर्णोद्वार को पूरा करने का जिम्मा ट्रस्ट का है। ग्रामीणों ने हैरानी जताई कि पिछले पांच माह से मंदिर का जीर्णोद्वार पूरी तरह से बंद है। ग्रामीणों ने रोष जताते हुए कहा है कि तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी मंदिर निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है, जबकि काम शुरू होने से पूर्व विभाग ने इस निर्माण कार्य को जल्द से जल्द पूरा करने का आश्वासन दिया था। लेकिन अभी भी काफी कार्य शेष है। श्राई कोटी मंदिर निर्माण में हो रही देरी को लेकर मंदिर कमेटी के सदस्य व ग्रामीण एसडीएम नरेंद्र चौहान से मिले। इस दौरान ग्रामीणों ने एसडीएम से मांग करते हुए कहा कि मंदिर निर्माण में ठेकेदार ने बेतरतीब ढ़ग से कार्य किया है। कार्य की गुणवत्ता का इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है, जिस मंदिर की छत को लगाए हुए कुछ ही समय बीता है वह अभी से ही टपकने लगी है। छत का कार्य अधुरा होने के साथ साथ अन्य कार्य भी लंबित पड़े है। ग्रामीणों का कहना है कि इस संबंध में लोनिवि के अधिकारी और ठेकेदार द्वारा बजट न होने का हवाला दिया जा रहा है। इस दौरान प्रतिनिधमंडल ने एसडीएम नरेंद्र चौहान के समक्ष मंदिर निर्माण के कार्य की जांच और मंदिर निर्माण कार्य शीघ्र पूरा करने की मांग रखी। इस मौके पर खेम सिंह, सुरेंद्र सिंह, सुख सागर, कमल नारायण, बिहारी, भरत, प्रदीप, रामनाथ, दिनेश मेहता, सुनिल चौहान, अमर सिंह, गुरू लाल, मंगल राम, बिहारी लाल, प्रदीप, भरत के अलावा कई अन्य ग्रामीण उपस्थित रहे।

दो मंदिरों से आता है लाखों का दान

भीमाकाली मंदिर ट्रस्ट में दस मंदिर पंजीकृत है। जिसमें दो मंदिर भीमाकाली मंदिर सराहन व श्राईकोटी मंदिर देवठी में लोगांें की अटूट आस्था है। यहां पर श्रद्वालुओं की तांता लगा रहता है। खासकर नवरात्रों में तो यहां पर हर दिन सैकड़ों लोग माथा टेकने आते है। बावजूद इसके अभी भी श्राईकोटी मंदिर का जीर्णोद्वार अधूरा पड़ा है।

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