असली-नकली पर सियासत

बिलासपुर—प्रदेश अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के तीन गुटों द्वारा अपने-अपने स्तर पर कार्यकारिणी का गठन करने के बाद अब मान्यता को लेकर जंग छिड़ गई है। बिलासपुर के किसान भवन मंे रविवार को संपन्न हुए राज्य कार्यकारिणी के चुनाव में नवनियुक्त अध्यक्ष विनोद ठाकुर ने उनकी अगवाई वाले अराजपत्रित कर्मचारी सेवाएं महासंघ को ही असली करार दिया है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से आग्रह किया है कि मान्यता पर सरकार फैसला करे और इससे पहले कार्मिक विभाग संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया पर सही तरीके से देखे, क्योंकि इसी संगठन को जेसीसी का अधिकार है। यहां बता दें कि प्रदेश अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ में वर्चस्व को लेकर जंग छिड़ी हुई है। मंडी जिला के सरकाघाट में एनआर ठाकुर गुट और शिमला में अश्वनी गुट अपने-अपने स्तर पर कार्यकारिणी का गठन कर चुके हैं, जबकि रविवार को विनोद गुट ने भी बिलासपुर में राज्य कार्यकारिणी के चुनाव करवा लिए। आपसी सहमति से महासंघ की कमान विनोद ठाकुर को सौंप दी गई है। ऐसे में अब मान्यता को लेकर जद्दोजहद शुरू हो गई है। अब देखना यह है कि सरकार किस गुट को मान्यता प्रदान करती है। चुनाव की प्रक्रिया संपन्न होने के बाद नवनियुक्त अध्यक्ष विनोद ठाकुर ने स्पष्ट किया कि यदि इससे पहले किसी गुट ने अपनी सुविधा या किसी के इशारे पर महासंघ के नाम पर चुनाव करवाए हैं तो उसने ऐसा करके कर्मचारियों में केवल भ्रम फैलाने का काम किया है। उन्होंने बताया कि एक गुट ने शिमला में सौ डेढ़ सौ लोगों की उपस्थिति में चुनाव करवाए हैं और अपने स्तर पर चुनाव करवाकर खुद ही अध्यक्ष बन बैठे। इसी प्रकार सरकाघाट में जिस गुट ने चुनाव करवाए हैं वह भारतीय मजदूर संघ से संबंद्ध है। ऐसे में कर्मचारियों में केवल भ्रम फैलाने का कार्य किया गया है, जबकि असली संगठन अराजपत्रित कर्मचारी सेवाएं महासंघ है और इसी संगठन को सरकार भी जेसीसी के लिए आमंत्रित करती है। विनोद ठाकुर ने मुख्यमंत्री से मान्यता देने से पूर्व हर पहलु पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया है।

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