आईजीएमसी में मरीजों का रिकॉर्ड जला, हड़कंप

शिमला —आईजीएमसी के हिस्टोपैथॉलॉजी लैब मंे लगी आग से मरीजा़ंे के इलाज मंे बड़ा झटका लगा है। डॉक्टर्स के द्वारा किए जाने वाले ऑपरेशन के बाद निकाले जाने वाले टिशू का आगामी जांच के लिए लैब भेजा जाता है। पैथेलॉजी लैब मंे ये पता लगता है कि उक्त मरीज़ को कैंसर है या नहीं लेकिन अस्पताल के लैब मंे लगी आग से उन कुछ मरीज़ांे का रिकॉर्ड भी जल गया है जिससे ये पता लगाना मुश्किल है कि मरीज़ के टिशू मंे कोई रोग था कि नहीं। सवाल तो ये उठे हैं कि अब मरीजा़ंे का बायप्सी के लिए दोबारा टिशू कैसे लिया जाएगा। फिलहाल लैब मंे वह तमाम रिकॉर्ड भी जल गया है जो काफी पुराना है। यदि कोई मरीज़ कैंसर को लेकर रिकॉर्ड को लेकर बीमारी की पुष्टि को क्र ास चैक करना चाहता है तो वह करना भी काफी मुश्किल हो सकता है। परेशानी यहीं तक सीमित नहीं है बल्कि आईजीएमसी प्रदेश का सबसे बड़ा अस्पताल है। जहां पर सभी राज्यांे से मरीज़ इलाज करवाने आते है। जिसमंे जो भी छोटे बड़े ऑपरेशन होते हैं, उसमंे मरीज का टिशूू लेकर  उसे हिस्टोपैथॅालोजी लैब ही भेजा जाता है। जिसमंे फाइनल तौर पर ये पुष्टि हो पाती है कि आखिर उस अंग मंे कैंसर है या नहीं। गौर हो कि कई ऑपरेशन इतने संवेदनशील होते हैं कि उसमंे दोबारा ऑपरेशन कतई नहीं किया जा सकता है। प्रति दिन आठ से दस मरीजा़ंे की बायप्सी यहां होती है। एक मरीज़ का टेस्ट रिपोर्ट आने मंे लगभग 21 दिन लग जाते है। सूचना है कि अब वह रिकॉर्ड भी जल गया है। जिसकी रिपोर्ट फाइल मंे तैयार कर दी गई थी। अब दोबारा से ये पुष्टि होनी मुश्किल हो गई है कि जिस मरीज़ का टिशू है, उसे आखिर क्या रोग है। कैंसर का इलाज मंे बायप्सी के रिपोर्ट के आधार पर कैंसर का इलाज भी किया जा सकता है।

आग से अहम मशीनेें राख

पैथोलॉजी लैब मंे अहम मशीनंे भी जल गई है जिससे बायप्सी की जा सके। बायप्सी मंे इस्तेमाल होने वाले कुछ उपकरण तो राख ही हो गए हैं। इन मशीनांे की कीमत लाखांे की बताई जा रही है।

कुछ ये बताए जा रहे हैं कारण

बताया जा रहा है कि रसायन की शीशी गिरने के बाद वह इलेक्ट्रिसिटी के संपर्क मंे आई जिससे आग भड़क गई। वहीं ये बताया जा रहा है कि वहां ब्लोर भी लगा था। हालांकि अभी आग लगने के कारणाांे की जांच की जाएगी लेकिन इसमंे कोई जान जाने की सूचना नहीं है। महत्वपूर्ण दस्तावेज जल गए हैं।

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