आमरण अनशन पर बैठे जलवाहक

कर्मचारी दैनिक भोगी बनाने और पक्की तैनाती न मिलने पर प्रदेश सरकार से नाराज

 मंडी -मंडी में चल रही अंशकालीन जलवाहक-कम-सेवादार संघ ने सोमवार को क्रमिक अनशन आमरण अनशन में बदल दिया है। इसके चलते पहले दिन नौ जलवाहक आमरण अनशन पर बैठ गए हैं। इसमें मंडी व बिलासपुर जिला के जलवाहक शामिल हैं। संघ के प्रदेश महासचिव बुद्धि राम व जिला अध्यक्ष भूट्टो राम ने बताया कि जिले के सभी जलवाहक आमरण अनशन के लिए तैयार हैं, लेकिन सेरी चानणी पर स्थान के आभाव के चलते केवल नौ जलवाहकों ही आमरण अनशन पर बैठे। इसमें कुछ विधवा महिलाएं भी बैठी हैं। जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जाती, वे अपने आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि जलवाहकों को 14 वर्ष के बाद नियमित किया जाता है और अगर शिक्षा विभाग में खाली पद नहीं होंगे, तो नियमित नहीं किया जाता है। अंशकालीन जलवाहकों के लिए नियम बना था कि 2012 में आठ वर्ष पूरा कर चुके जलवाहकों को दैनिक भोगी बनाया जाए। 2012 से 2017 तक नियम के मुताबिक दैनिक भोगी बनाया गया, लेकिन 2018 में आठ महीने बाद दैनिक भोगी बनाया गया, जबकि वर्ष 2019 में अभी तक दैनिक भोगी नहीं बनाया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार के आदेश के मुताबिक 31 मार्च व 30 सितंबर में जलवाहक डेलिवेज बनाए जाते हैं, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है। पहले दिन रविंद्र कुमार, सुमना कुमारी, प्यार चंद, रीता देवी, पवन, चेत राम, कमल किशोर, सुरेश व गुड्डू राम आमरण अनशन पर बैठ गए हैं। 

ये हैं मुख्य मांगें

10 वर्ष का कार्यकाल पूरा कर चुके जलवाहकों को नियमित करने, अगर शिक्षा विभाग में खाली पद नहीं है, तो बिना शर्त अन्य विभागों में भेजने, अंशकालीन जलवाहकों को पांच वर्ष बाद डेलिवेज बनाने और उसके तीन वर्ष बाद नियमित करने, जलवाहकों की सेवानिवृत्ति आयु 58 से बढ़ाकर 60 वर्ष करना आदि मांगें शामिल है।

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