इनको नहीं जान की परवाह

चुवाड़ी—बरसात शुरू हो चुकी है, लेकिन भटियात की खड्डांे व डिब्बरों में जान जोखिम में डाल कर नहाने वाले किशोर व युवाओं की टोलियां आम देखी जा रही है। दरअसल जैसे ही गर्मियां शुरू होती हैं प्रदेश की नदियों, खडडों और नहरों से मातम की खबरें आने लगती हैं। चिलचिलाती धूप में पानी गजब का सम्मोहन पैदा करता है। जबकि स्कूलों में छुट्टियां चल रही है। फिर भी घरवालों से चोरी छिपे ये मतवाले युवा खडडों का रूख कर रहे हैं। इस सम्मोहन में फंसे युवा और किशोर नहाने के लिए जान दांव पर लगाकर नदियों और नहरों में खतरे की छलांग लगाते हैं। इनमें से कई ऐसे होते हैं जो छलांग के बाद फिर उबर नहीं पाते।  लगातार हादसों के बावजूद इन कच्ची उम्र के बच्चे  टोलियों में इन खड्डों का रूख करने से गुरेज नहीं करते हैं,  जिसके चलते थोडी सी चुक बडे हादसे का कारण बन जाती है। जल-धाराओं और खड्डों के किनारे गांवों और बस्तियों के लोगों को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए, क्योंकि सवाल हमारे युवाओं और बच्चों की सुरक्षा का है। भटियात में गर्मी के चलते युवा नहरों और दरियाओं का रुख करने लगते हैं। बावजूद इसके युवक पानी में कूदते हैं और कई बार जान से भी हाथ धो बैठते हैं। भटियात की इन खड्डों में चक्की,कलम एवं बराहल के साथ ही एरिया जहां नहाने वालों का जमघट लगाता है। जैसे चुवाड़ी के समीप नोले की डिब्बर, ददरियाडा पुल के पास, होबार खड्ड के समीप, बनेट खड्ड के समीप व सियुणी पुल के पास और गौड खड्ड में रश बराबर बना रहता है।

 कई लोग गंवा चुके हैं जान…

बीते दिनों में पौंग में नहाते दो युवाओं की मौत, वहीं भटियात एक सात वर्ष के मासूम बच्चे की कलम खड्ड में डूबने के दर्दनाक हादसे ने इलाकावासियों को झंकोर दिया और इससे पहले भी चक्की खड्ड में पिकनिक मनाने परिवार संग आई महिला के डूब जाने की घटना भी घट चुकी है।

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