एस्सार-आर्सेलर मित्तल केस में बैंकों को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थ‍िति बनाए रखने को कहा

एस्सार स्टील को आर्सेलर मित्तल समूह को बिक्री के मामले में बैंकों को राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि एस्सार इन्सॉल्वेंसी केस में यथास्थ‍िति (status quo) को बरकरार रखी जाए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में सभी मसलों का समाधान किया जाएगा और केस की सुनवाई तेज की जाएगी सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (NCLAT) पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि वह एक रेजोल्यूशन प्रोफेशनल की तरह काम नहीं कर सकता. गौरतलब है कि यह विवाद बैंकों के अधिकार और बैड लोन के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण था, क्योंकि कर्ज लेने वाली कंपनी एस्सार स्टील आईबीसी के तहत इन्सॉल्वेंसी यानी दिवालिया होने की प्रक्रिया से गुजर रही है. जस्ट‍िस आर.एफ. नरीमन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि मॉनिटरिंग कमिटी को 7 अगस्त तक अपना काम करते रहना होगा, जिस दिन इस मामले की अगली सुनवाई होगी.

क्या है मामला

गौरतलब है कि NCLAT ने अपने 4 जुलाई के आदेश में कहा था कि उसने स्टील टाइकून लक्ष्मी मित्तल के नेतृत्व वाली कंपनी आर्सेलर मित्तल के 42,000 करोड़ रुपये में एस्सार स्टील को खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. उसने एस्सार के शेयरधारकों की इसको रोकने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया था. लेकिन सुप्रीम कोर्ट में एनसीएलएटी के इस आदेश के खिलाफ अपील की गई थी और कोर्ट ने अब बैंकों को राहत दी है.

नए इन्सॉल्वेंसी और बैंकरप्शी कोड (IBC) के तहत एस्सार स्टील की नीलामी कर 54,547 करोड़ रुपये जुटाने का प्रस्ताव था ताकि बैंकों और अन्य कर्जदाताओें के बकाया का भुगतान किया जा सके.

कंपनी के दिवाला अदालत (बैंकरप्सी कोर्ट) में जाने के बाद उसके मूल प्रमोटर रुइया बंधुओं ने जून 2017 से एक के बाद एक कानूनी रूप से मामले को चुनौती दी. उनका कहना था कि 54,389 करोड़ रुपये की पेशकश सबसे ज्यादा है. एस्सार स्टील को खरीदने के लिए आर्सेलर मित्तल ने लोन रेजोल्युशन के लिए 42,000 करोड़ रुपये के भुगतान तथा इस्पात कारखाने में 8,000 करोड़ रुपये की पूंजी डालने का प्रस्ताव किया था. एस्सार स्टील के पास एक करोड़ टन क्षमता का स्टील कारखाना गुजरात के हजीरा में है.   

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