करसोग कालेज में एसएफआई का धरना

करसोग -एस एफ आई इकाई करसोग ने महाविद्यालय में छात्र मांगों को महाविद्यालय प्रशासन द्वारा पुरा ना करने व छात्रों को आ रही दिक्कतों को लेकर रोष प्रकट करते हुए धरना प्रर्दषन किया गया तथा आगामी 24 घंटे की धरना हड़ताल करने का निर्णय लिया गया। इससे पहले भी 15 जुलाई को एसएफआई द्वारा धरना-प्रदर्शन किया गया था जिसमें छात्रों की मुख्य मांगे थी कि कालेज कैंटीन जो कई महीनों से बंद पड़ी है उसे जल्द खोला जाए, कालेज में प्राध्यापकों के रिक्त पदों को जल्द भरा जाए ताकि छात्रों की निरंतर कक्षाएं लगे, महाविद्यालय के लिए छात्रों को बस लगाई जाए व महाविद्यालय में बस पास काउंटर खोला जाए व महाविद्यालय में टूटे पड़े डेस्क, पंखों व बिजली की मरम्मत की जाए। परंतु महाविद्यालय प्रशासन द्वारा इन मांगों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। इन मांगों पर एसएफआई इकाई अध्यक्ष संतोष ने कहा कि कालेज कैंटीन कई महीनों से बंद पड़ी है उस ओर महाविद्यालय प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है। जिस कारण छात्रों को दूर-दूर होटलों में जाना पड़ रहा है और महाविद्यालय में टूटे डेस्कों, पंखों व बिजली की मरम्मत नहीं करवाई गई है जिस कारण छात्रों को महाविद्यालय कक्षाओं में गर्मी झेलनी पड़ रही है उन्हेनें कहा कि करसोग महाविद्यालय के लिए अनेकों छात्र दूर-दराज के गांव से बसों में कालेज तक आते हैं लेकिन ओवरलोडिंग न करने के कारण आजकल छात्रों को बसों से बाहर निकाला जा रहा है जिस कारण उनकी कक्षाएं छूट रही है उनके लिए विषेष कालेज बस लगाई जाए ताकि वे छात्र समय पर कालेज पहुंच सकें, छात्रों की इन समस्याओं का मुख्य कारण एससीए इलेक्शन नहीं होना है क्योंकि जब महाविद्यालय में छात्र संघ के इलेक्शन होते थे तो छात्र कार्यकारिणी समिति होती थी जो छात्रों के मुद्दों को लेकर छात्रों के हक के लिए लड़ती थी लेकिन पिछले कुछ वर्षो से चुनाव बंद होने के कारण एससीए का गठन बिना चुनाव के किया जा रहा जिसमें ऐसे छात्रों का चयन किया जाता है जिनका ध्यान छात्रों की दिक्कतों में ना होकर अपनी किताबों में ज्यादा रहता है। जिस कारण छात्रों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा इसलिए प्रदेश सरकार से मांग है कि जल्द से जल्द छात्र चुनाव बहाल कराएं। इस धरना प्रदर्शन में इकाई उपाध्यक्ष अनिल छात्रा संयोजक प्रिया व समिति सदस्य कामेश्वर, गोकुल, बलवंत, अजय, बिट्टू, हिमानी, पूजा, कविता व अन्य 30 सदस्य मौजूद रहे।

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