किन्नौर में बूढ़ी बसें दे रही मौत को दावत

रिकांगपिओ—हाल ही में शिमला व बंजार के निकट हुए बस दुर्घटनाओं से भी हिमाचल पथ परिवहन निगम ने सबक नहीं ली है। आज भी हिमाचल की दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में परिवहन निगम की कई ऐसी बसे सड़को पर आए दिन दौड़ रही है जिन की बुक वेल्यू खत्म हो चुकी है। निगम की बूढ़ी हो चुकी कई बसे कभी भी यात्रियों की जान पर बन सकती है। बताते चले कि हिमाचल पथ परिवहन निगम रिकांगपिओ डिपू में इस समय दस बसे ऐसी है जो 7. 8 लाख किलोमीटर से भी अधिक चल चुकी है। जबकि निगम के नियम ए कायदे कानूनों के अनुसार जनजातीय क्षेत्रों में 725000 किलोमीटर का सफर पूरी करने के बाद उस बस की बुक वेल्यू खत्म हो जाती है। जिस के बाद इन बसों को प्रदेश के निचले क्षेत्रों में शिफ्ट किया जाता था, ताकि कठिन पहाड़ी क्षेत्रों में दुर्घटनाओं से बचा जा सके। लेकिन रिकांगपिओ डिपो में आठ लाख किलोमीटर का सफर करने के बाद भी कई बसों को किन्नौर की खतरनाक सड़कों पर  दौड़ाई जा रही है। इस समय किन्नौर के अति  दुर्गम क्षेत्रों में शुमार कुनो-चारंग ए आसरंग ए रोपा, यूला, रोघी, पुरबनी, उरनी, बड़ा कंबा आदि खतरनाक सड़को पर इन बूढ़ी बसों को निगम चला रही है जो कभी भी किसी बड़ी अनहोनी घटना को न्योता दे सकता है। किनौरिंग सोशल डवलपमेंट फाउंडेशन संस्था के अध्यक्ष शान्ति स्वरूप पंचारस ने इस पूरे मामले पर गंभीरता दिखाते हुए बताया कि ऐसे गंभीर विषय पर उन सभी अधिकारियों की जवाव देही सुनिश्चित होनी चाहिए जिन की देख रेख  में यह सब हो रहा है।

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