क्षमता से कितना बाहर पांवटा साहिब

हिमाचल प्रदेश के दक्षिण छोर में यमुना नदी के तट पर स्थित गुरु की सुंदर नगरी पांवटा साहिब की विश्वभर में अलग पहचान है, लेकिन आबादी के हिसाब से यहां विकास नहीं हो पाया। क्षमता से ज्यादा बोझ ढो रहे पांवटा साहिब की यही तस्वीर दखल के जरिए पेश कर रहे हैं… दिनेश पुंडीर

हिमाचल प्रदेश के दक्षिण में यमुना नदी के तट पर स्थित गुरु की सुंदर नगरी पांवटा साहिब की विश्वभर में अलग पहचान है। यह पहचान यहां स्थित गुरुद्वारा गुरु श्री गोबिंद सिंह  और सर्वधर्म समभाव के कारण मुख्य तौर पर है। यहां पर स्थित सिखों के दसवें गुरु दशम पातशाह श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रवास के कारण यहां गुरुद्वारा साहिब विश्व विख्यात है। वहीं सर्वधर्म समभाव के रूप में शहर ने एक मिसाल कायम की हुई है। सभी धर्मों व संप्रदायों एवं संगठनों के लोग मैत्रीभाव से सौहार्दपूर्ण वातावरण को सकारात्मक रूप प्रदान करने में हमेशा सफल रहे हैं। साल भर में यहां पर सभी धर्मों के पर्व व त्योहार बड़े ही सौहार्दपूर्ण तरीके से मनाए जाते हैं। फिर वह चाहे गुरु पर्व हो या जगन्नाथ यात्रा, ईद हो या दिवाली, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी हो या क्रिसमस, वाल्मीकि जयंती हो या दुर्गा पूजन या बिहारी समुदाय का छठ पर्व व महाशिवरात्रि पर्व हो, सब सौहार्दपूर्ण तरीके से मनाए जाते हैं। औद्योगिकीकरण के कारण यहां पर पूरे देशभर से लोग बसे हुए हैं, जिससे साल भर के पर्व के दौरान यहां पर अनेकता में एकता की झलक दिखाई पड़ती है। पांवटा साहिब शहर वार्ड-1 से लेकर वार्ड -13 में बंटा हुआ है, जबकि जनसंख्या घनत्व लगातार बढ़ रहा है। उसके मुताबिक शहर का विस्तारीकरण, जिस तेज गति से होना चाहिए था, वह नहीं हो पा रहा है। इस कारण शहर तेजी से सिकुड़ता जा रहा है। वैसे तो नगर परिषद का दायरा करीब 6.5 स्क्वेयर किलोमीटर है, लेकिन दिनोंदिन बढ़ती आबादी इस दायरे को भी कम लगने लगी है। जानकार बतातें हैं कि नगर परिषद क्षेत्र के अंतर्गत  करीब 20 से 25 हजार की आबादी के लिए माकूल स्थान है , लेकिन यह संख्या लगभग दुगुनी हो चुकी है, जिससे नगर पर दबाव बढ़ता जा रहा है और कई इलाकों मे ंमकानो की भीड़भाड़ होने से शहर की सुंदरता बिगड़ने लगी है। हालांकि शहर दूर-दूर तक फैल चुका है और नगर परिषद के दायरे से बाहर और आसपास की पंचायतों में घनी आबादी वाली कालोनियां बस गई हैं। यहां पर औद्योगिकीकरण के कारण रोजगार और शिक्षा के लिए लोगों का आना लगातार जारी है, जिस कारण शहर क्षमता से बाहर होता जा रहा है। शहर की क्षमता सीमित हो रही है, वहीं शहर में विकास जिस रफ्तार से हो रहा है, उसमें वैज्ञानिक विकास की काफी आवश्यकता है।

वाटर स्पोर्ट्स की अपार संभावनाएं

पांवटा साहिब क्षेत्र धार्मिक, साहसिक पर्यटन, शिक्षा हब, हैल्थ पर्यटन एवं अन्य क्षेत्रों में अपार संभावनाएं रखता है। यमुना नदी के पानी के न्यूनतम जलस्तर की सुविधा प्रदान कर साहसिक पर्यटन जैसे राफ्टिंग वोटिंग एवं अन्य वाटर स्पोर्ट्स यहां शुरू किए जा सकते हैं। पांवटा साहिब में बाबा भूरे शाह तक रोप-वे या केबल कार की सुविधा प्रदान कर विशेष आकर्षण का केंद्र बनाया जा सकता है। औद्योगिक हब, शिक्षा हब एवं चिकित्सा सुविधा प्रदान कर हैल्थ पर्यटन एवं धार्मिक तथा साहसिक खेलों के क्षेत्र में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। पांवटा साहिब सर्वधर्म भाव के रूप में राष्ट्रीय एकता एवं सांप्रदायिक सद्भावना केंद्र के रूप में ख्याति प्राप्त स्थान है। 

-आरुषि शर्मा, छात्रा

पांवटा को एसपी जिला बनाने की दरकार

पांवटा साहिब में आबादी बढ़ती जा रही है, उस हिसाब से यहां पर कानून व्यवस्था सुदृढ़ नहीं की जा रही है। यही कारण है कि पांवटा साहिब प्रदेश मे क्राइम के मामले में अग्रणी स्थान पर रहता है।  मुट्ठीभर पुलिस कर्मी शहर की करीब 50 हजार आबादी की रखवाली कर रहे हैं। इसके अलावा एक्सीडेंट व अन्य मामलों को निपटाने में ही उनका ज्यादातर वक्त गुजर जाता है। शहर में स्थापित पुलिस थाने में वर्ष 1978 के स्वीकृत पदों पर ही अब तक कानून व्यवस्था चल रही है। उस समय नगर की आबादी करीब 10 हजार रही होगी, लेकिन आज यह पांच गुना से भी अधिक हो गई है और स्वीकृत पदों की संख्या में इजाफा नहीं हो रहा है। ऐसे में पुलिस कर्मी भी वर्क लोड में पिस रहे हैं। ऐसे में यह समय की जरूरत बन गई है कि पांवटा साहिब में भी बीबीएन की तर्ज पर एसपी जिला बनना चाहिए। साथ ही पुलिस चौकियों के पुराने व जर्जर भवनों की दशा भी सुधारी जानी चाहिए

—सचिन ओबरॉय, स्वतंत्र टिप्पणीकार

अतिक्रमण पर करनी होगी कार्रवाई

यदि हमें अपने पांवटा साहिब को सुंदर और व्यवस्थित तीर्थ स्थान बनाना है तो प्रशासन को अवैध निर्माण और अतिक्रमण पर कड़ा अंकुश लगाना होगा।  गैर कानूनी अवैध कब्जा जैसे छोटे-बड़े व्यवसायियों की आदत सी बन गई है। एक तो नगर के अंदर पहले ही संकरे बाजार हैं और ऊपर से अवैध कब्जा। फिर उसी बाजार में वाहनों का आवागमन, जिससे पैदल चलने वालों के लिए जगह ही नही बचती। गाडि़यों को मनचाही जगह पर खड़ा कर देना भी समस्या पैदा करता है। प्रशासन को चाहिए कि वह इन सब चीजों पर अंकुश लगाए। यदि हमारा शहर सुंदर और व्यवस्थित दिखेगा तो पर्यटक भी यहां आएंगे, इसके लिए सरकार और स्थानीय प्रशासन को संजीदा प्रयास करने होंगे

—सुधा कालिया, वरिष्ठ समाजसेवी

सड़कों को खुला करना जरूरी

पांवटा साहिब औद्योगिक नगर में वाहनों की संख्या दिन- प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। उस लिहाज से सड़कें काफी संकरी हो चली हैं।  एनएच सहित लिंक रोड की चौड़ाई दो दशक पुरानी है। उस समय गिने चुने वाहन ही हुआ करते थे, लेकिन आज वाहनों की संख्या बढ़ गई है।  इससे  भीड़भाड़ और जाम की स्थिति भी उभर आई है। पांवटा में इस समय 57 हजार से अधिक वाहन सड़कों पर हैं। साथ ही  यहां से होकर रोजाना हजारों वाहन गुजरते हैं, जिनका सारा भार नगर के बीचोंबीच एनएच पर पड़ रहा है।  ऐसे में सरकार को जहां एनएच की चौड़ाई बढ़ाकर या तो इसे फोरलेन करना चाहिए या फिर बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों के लिए बाइपास बनाकर नगर की भीड़ को कम करने के प्रयास करने चाहिए। साथ ही सिरमौर ट्रक ऑपरेटर यूनियन की पुरानी ट्रांसपोर्ट नगर की मांग को भी पूरा करना चाहिए

  —सतीश गोयल, अध्यक्ष चैंबर ऑफ  कामर्स एंड इंडस्ट्री 

अतिक्रमण ने बिगाड़ी सूरत

पांवटा साहिब मे हालांकि अवैध निर्माण के मामले कम ही देखने को मिले हैं , लेकिन नगर में अतिक्रमण ने शहर की सूरत जरूर बिगाड़ दी है। जगह-जगह रेहड़ी-फड़ी और दुकानदारों द्वारा दुकान के बाहर सामान सजाकर रखने से गलियां और बाजार की सड़कें तंग हो गई हैं, जिससे बाजार मे आना-जाना भी मुश्किल हो गया है।  बद्रीपुर स्थित जामनीवाला रोड पर शाम के समय  भीड़ रहती है, जिससे वहां अकसर लंबा जाम लगता है। 

कृत्रिम झील खींचेगी पर्यटक

पांवटा नगर को मां यमुना नदी के रूप में एक बड़ी सौगात मिली हुई है। यदि हम इस नदी का उपयोग सही ढंग से कर पाएं तो यह पर्यटकों के लिए एक आर्कषक का केंद्र बन सकता है। ब्राह्मण सभा पांवटा साहिब के प्रधान अजय शर्मा बतातें हैं कि यमुना घाट पर एक कृत्रिम झील बनाई जा सकती है। इस झील पर यदि बोटिंग शुरू हो तो यहां पर पर्यटक खुद-ब-खुद रुकेंगे।

25 होटल, 500  के ठहरने की क्षमता

पांवटा साहिब में हालांकि गुरुद्वारा साहिब में ठहरने की बुहत अधिक क्षमता है, लेकिन फिर भी यहां पर अच्छे व बेहतरीन सुविधाएं प्रदान करने वाले करीब 25 होटल हैं।   इन होटलों में एक समय में करीब 500 यात्रियों के ठहरने की क्षमता है। होटल व्यवसायी व गुरु सुरभि होटल के मालिक प्रदीप चौहान बतातें हैं कि पांवटा साहिब के होटल के कारोबार में उतार-चढ़ाव लगा रहता है। हालांकि गर्मियों के मौसम में अप्रैल से जून माह तक होटलों में काफी यात्री आते हैं। इस दौरान चारधाम और हेमकुंड साहिब की यात्रा चली होती है, जिससे इस दौरान पांवटा साहिब में काफी भीड़ रहती है।

….तो हर साल आएंगे 300 करोड़ 

अनिंद्र सिंह नौटी प्रधान, व्यापार मंडल

पांवटा साहिब में विकास के लिए एक विजन डॉक्यूमेंट कनक्लेव कमेटी का गठन हुआ है। इसके समन्वयक पांवटा व्यापार मंडल के प्रधान अनिंद्र सिंह नौटी है। उन्होंने पांवटा के विकास के लिए कई सामाजिक संस्थाओं और वरिष्ठ नागरिकों से सुझाव मांगें और चर्चा की है। उन्होंने बताया कि यदि हम पांवटा से गुजरने वाले पर्यटकों को सिर्फ  दस मिनट के लिए पांवटा में ही रोक सकें, तो पांवटा को हर साल इन पर्यटकों से कम से कम 300 करोड़ रुपए की आमदनी हो सकती है। 

57 हजार गाडि़यां 100 की पार्किंग

पांवटा साहिब आरएलए कार्यालय के तहत अभी तक  57 हजार से अधिक वाहन रजिस्टर्ड हो चुके हैं,लेकिन इनमें से ज्यादातर लोगों के घरों में अपनी पार्किंग की सुविधा है। इन रजिस्टर्ड 57697 वाहनों में सबसे अधिक दोपहिया वाहन 40986 है। इसके बाद मोटर कार 9674 और गुड्स कैरियर 3980 हैं। कामर्शियल ट्रैक्टर 1850, बसें 272 और एग्रीकल्चर ट्रैक्टर  270 हैं। इसके अतिरिक्त प्राइवेट व्हीकल्स की संख्या 301 है। हालांकि दिनभर  अपने कार्य के लिए रोजाना पांच से छह हजार वाहन नगर में निकलते हैं,  जो पार्किंग के अभाव मे सड़क किनारे खड़े किए जाते हैं। इससे अकसर जाम की स्थिति बनी रहती है। इसके अतिरिक्त सीमांत नगर होने के कारण बाहरी राज्यों उत्तराखंड और हरियाणा होते हुए रोजाना औसतन कम से कम तीन से चार हजार छोटे-बड़े वाहन पांवटा नगर में पंहुचते हैं,लेकिन यदि पार्किंग की स्थिति देखी जाएं तो बड़ी ही दयनीय हैं। नगर परिषद के पास इस समय सिर्फ  पुलिस मैदान के समक्ष एक पार्किंग ग्राउंड है, जिसमें केवलमात्र 100 गाडि़यां एक समय में खड़ी का जा सकती हैं। आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि रोजाना कितनी गाडि़यां सड़कों के किनारे खड़ी होकर नगर की व्यवस्था को किस प्रकार बदहाल कर रही हैं।

तीन नदियों के बीच बसा है पांवटा शहर

पांवटा शहर की सबसे बड़ी खासियत है कि यह नगर तीन नदियों के बीच बसा हुआ है। जिनमे प्रमुख रूप से यमुना नदी है। पांवटा साहिब प्रदेश का एकमात्र नगर है ,जहां से होगा यमुना नदी गुजरती है। यह नदी पूर्व से पश्चिम की और नगर के दक्षिण भाग से होकर गुजरती है। वहीं दो अन्य नदियों मे बाता नदी और गिरि नदी है। गिरि नदी नगर के पूर्वी छोर में और बाता नदी पश्चिमी छोर से होकर निकलती है, जिस प्रकार दिन प्रतिदिन नगर क्षमता से बाहर होता जा रहा है, नगर में दिक्कतें सामने आने लगी हं। वाहनों की भीड़भाड़ के कारण सड़क दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। औद्योगिकीकरण के कारण बाहरी राज्यों से आने वाले लोगों की उपयुक्त पहचान न हो पाने के कारण क्राइम रेशों भी बढ़ रही है। पांवटा पुलिस के पास स्टॉफ  1978 का स्वीकृत है, लेकिन आज आबादी उन स्वीकृत पदों के समय से करीब 10 गुना बढ़ चुकी है। पार्किंग की व्यापक सुविधा नहीं है, जिस कारण ज्यादातर वाहन सड़क किनारे खड़े होकर शहर की सुंदरता और व्यवस्था को बिगाड़ते हैं। हालांकि पांवटा एक समतल दून क्षेत्र है, जिस कारण यहां पर सरकारी भवनों और होटलों के निर्माण ने ज्यादा तबाही नही मचाई है।

यमुना किनारे बनेगी बड़ी पार्किंग

एसएस नेगी , कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद

पांवटा नगर में  पार्किंग एक बड़ी समस्या के रुप में उभर रही है। इसके समाधान के लिए नगर परिषद भी प्रयास करने लगी है। अगले पांच वर्षों के भीतर नगर परिषद यमुना नदी के किनारे पर एक ऐसा पार्किंग स्थल तैयार करना चाहती है, जहां पर हजारों छोटे-बडे़ वाहन खड़े किए जा सकें। इस बारे नगर परिषद पांवटा साहिब के कार्यकारी अधिकारी एसएस नेगी ने बताया कि वह नगर के विभिन्न स्थानों पर तो मल्टीप्लेक्स पार्किंग तैयार करवाने पर लगे हुए हैं। इसमे एमसी कॉम्पलेक्स के पीछे की पार्किंग का कार्य शुरू हो चुका है, जिसे जल्द पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि उन्होंने पार्किंग की समस्या को देखते हुए शहरी विकास विभाग को एक प्रोपोजल भेजकर सुझाव दिया है कि नगर में केदारपुर गांव के नीचे यमुना नदी के किनारे पर बड़ी पार्किंग तैयार की जा सकती है। यह एक बड़ा प्रोजेक्ट है और इसके तहत यमुना नदी की तरफ  करीब 17 फुट ऊंची और करीब एक किलोमीटर लंबी दीवार बनाकर बड़ी पार्किंग का निर्माण किया जा सकता है। इस प्रस्तावित पार्किंग स्थल पर एक समय मे हजारों छोटे व बड़े वाहन पार्क किए जा सकते हैं। इससे पार्किंग की समस्या  दूर हो जाएगी। इसके अलावा 30 छोटे-छोटे पार्क डिवेलेप करने, नगर को पूरी तरह से सीवरेज से जोड़ने और भूमिगत निकासी का कार्य पूरा किया जाना मुख्य है। साथ ही एक बड़ा सामुदायिक भवन और डोर टू डोर कूड़ा निष्पादन योजना को लागू करना भी योजना में शामिल है।

शहर में ढूंढते रह जाओगे ओपन स्पेस

कंकरीट का जंगल निगल गया ग्रीन एरिया

शहर में लगातार खुले स्थान व मैदान कम होते जा रहे हैं। कोई भी स्तरीय पार्क की व्यवस्था नहीं है एवं सैरगाह की लगातार कमी महसूस की जा रही है। शहर में कोई भी इनडोर स्पोर्ट्स कांप्लेक्स सभागार या थियेटर नहीं है, जिसकी कमी भी लगातार महसूस हो रही है। वहीं, क्षेत्र में विस्तार प्रदान कर एक स्पोर्ट्स स्टेडियम की भी नितांत मांग होती रही है। शहर में लगातार निर्माण कार्यों के चलते पेड़ों का कटान होता रहा है, जिससे अब ग्रीन एरिया कम होता जा रहा है  और कंकरीट के भवन खड़े होते जा रहे हैं। वहीं, बढ़ते ट्रैफिक एवं औद्योगिक इकाइयों के प्रदूषण के कारण शहर की आबोहवा भी निश्चित रूप से प्रभावित हो रही है। शहर में वर्किंग ऑवर में एसडीएम परिसर में अधिक भीड़ रहती है, लेकिन पार्किंग की व्यवस्था न होने के कारण यहां पर अकसर गाडि़या सड़क किनारे खड़ी रहती हैं, जिससे यहां जाम की स्थिति भी बनी रहती है। कालोनियों की बात करें तो नगर परिषद क्षेत्र में तो हर कालोनी अब भीड़भाड़ वाली हो गई है। लोगों द्वारा अवैध कब्जे करने के कारण ज्यादातर कालोनियों की सड़कें संकरी हो चुकी हैं, जिसमें छोटे वाहन ले जाना भी मुश्किल हो गया है। इसके अतिरिक्त प्रत्येक छोटे-बड़े त्योहार व विशेष दिनों में आसपास के राज्यों से स्थानीय गुरुद्वारा साहिब में पर्यटकों की आवाजाही लगी रहती है। शहर के बीचोंबीच मुख्य स्थल नगर पालिका कार्यालय परिसर के आसपास बेतरतीब पार्किंग के कारण भीड़भाड़ का माहौल बना रहता है। लगातार बढ़ रही वाहनों की संख्या से शहर में अब हर समय ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रहती है, इसके फलस्वरूप शहर के तीनों चौक परशुराम चौक, महाराजा अग्रसेन चौक व गुरु गोबिंद सिंह चौक लगातार भीड़भाड़ व छोटे-बड़े हादसों वाले क्षेत्रों के रूप में उभर रहे हैं। कुल मिलाकर पांवटा में दिनोंदिन बढ़ती भीड़ में खुले स्थानों को खत्म कर दिया है, जहां लोग दो पल सकून के बिता सकें।

उत्सव के मौके पर उमड़ती है महाभीड़

ऐतिहासिक धार्मिक नगरी पांवटा साहिब में विश्व विख्यात गुरुद्वारा साहिब में नववर्ष, लोहड़ी, होला मोहल्ला, वैसाखी, हेमकुंड साहिब यात्रा, चार धाम यात्रा, जगन्नाथ यात्रा, यमुना शरद महोत्सव, ईद व अन्य हिंदू धर्म के त्योहार जैसे दिवाली, दशहरा, वामन द्वादशी, परशुराम जयंती, नगर कीर्तन व गुरु पर्व आदि मौकों पर एकाएक भीड़ बढ़ जाती है। मार्च माह में नगर परिषद के होली मेले और गुरुद्वारा साहिब के होला मोहल्ले पर पांवटा साहिब में वर्ष भर में सबसे अधिक भीड़ उमड़ती है। इसके अलावा समय-समय पर राष्ट्रीय राज्य एवं जिला स्तर पर होने वाले धार्मिक खेलकूद एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम भी भीड़ बढ़ाने का कारण बनते हैं।

गुरु की नगरी को टूरिज्म के रूप में विकसित करे सरकार

मां यमुना की गोद में बसी गुरु की नगरी पांवटा साहिब में यदि सरकार और पर्यटन निगम की नजर-ए-इनायत हो तो पांवटा साहिब में पर्यटक हर साल 300 करोड़ रुपए से अधिक खर्च कर सकते हैं। इस राशि से जहां यहां के व्यापारियों की आर्थिक हालत सुधरेगी। वहीं, पांवटा के विकास को भी चार चांद लगेंगे। पांवटा गुरु की पावन नगरी है और यहां से हर साल कम से कम तीन लाख श्रद्धालु और पर्यटक गुजरते हैं, लेकिन अभी तक भी इन पर्यटकों को पांवटा में कुछ देर ही सही रोकने के लिए कोई खास प्रबंध नहीं है। लाखों श्रद्धालु यहां के ऐतिहासिक गुरु गोबिंद सिंहजी के गुरुद्वारे में मत्था टेकने आते हैं। पर्यटकों के लिए पांवटा में अभी तक ऐसा कोई उपयुक्त रमणीक स्थल नहीं उभरा है, जहां सैलानी  घूम सकें और यहां की सुंदरता का आनंद ले सकें। पांवटा साहिब में बहुत से ऐसे क्षेत्र हैं, जिन्हें विकसित कर पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है। यहां पर नगर के किनारे बह रही यमुना नदी आकर्षण का केंद्र बन सकती है। पर्यटन निगम यदि पहल करें तो इस नदी में यमुना घाट के पास एक सुंदर कृत्रिम झील का निर्माण किया जा सकता है, जिसमें बोटिंग का पर्यटक आनंद ले सकते हैं। यहां के दो पुराने पार्कों की हालत को भी सुधारा जा सकता है। गिरिपार क्षेत्र में निगाली को एक हिल स्टेशन के रूप में उभारा जा सकता है। यहां पर प्राकृतिक सुंदरता कूट-कूट कर भरी है, सिर्फ उसे तराशने की जरूरत है। खोदरी-टौंरू प्रस्तावित रोप-वे पर भी कार्य पूरा करके क्षेत्र मे पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है। इसके अलावा पांवटा के साथ लगता कर्नल शेरजंग नेशनल पार्क भी पर्यटकों के लिए एक रोमांचक पर्यटक स्थल के तौर पर उभर सकता है। यहां पर पर्यटक विभिन्न प्रजातियों के पशु-पक्षियों को देखने के लिए आ सकते हैं। बशर्तें उन्हें सुविधाएं मिलें। हालांकि पांवटा में यमुना पथ के नाम से नदी किनारे एक रास्ता बनाया गया है, जो आने वाले समय में पर्यटकों के लिए आर्कषक का केंद्र बन सकता है, लेकिन यदि प्रयास हो तो पांवटा में इससे अधिक पर्यटन स्थल विकसित किए जा सकते हैं।   

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