खड्डों में बाढ़ आए तो कौन बचाए

भोरंज—उपमंडल भोरंज की करीब एक दर्जन पंचायतों से होकर गुजरने वाली प्रमुख खड्डों सीर, सुनैहल, चैंथ, कुणाह  से बरसात के दिनों मंे बाढ़ से होने वाली तबाही व आने वाली आपदाओं के लिए भोरंज प्रशासन  सजग दिखाई नहीं दे रहा है। काबिलेगौर है कि बरसात के दो महीनों जुलाई व अगस्त में उपमंडल के विभिन्न कस्बों से होकर निकलने वाली ये प्रमुख खड्डें हर वर्ष सैकड़ों परिवारों को जान और माल के नुकसान पहुंचाती हंै, जिससे बचने के लिए हर वर्ष भोरंज प्रशासन की ओर से उपमंडल के हजारों ग्रामीणों को खड्डों में आने वाली बाढ़ से बचाने के लिये संबंधित पंचायतों के माध्यम से अलर्ट जारी कर खड्डों में जाने को प्रतिबंधित किया जाता है, साथ ही बाहरी राज्यों से आए लोगों जो कि झुग्गी-झोंपडि़यों में रह रहे प्रवासियों को खड्डों के किनारे से हटाकर सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित होने के आदेश बरसात से पूर्व ही जारी कर दिए जाते थे, लेकिन इस बार भोरंज प्रशासन बरसात मे होने वाली आपदाओं के लिए सजग दिखाई नहीं दे रहा है। जुलाई माह बीतने को है और प्रशासन द्वारा क्षेत्र मंे खड्डों के समीप रह रहे लोगों को अभी तक किसी भी प्रकार का कोई भी अलर्ट जारी नहीं किया गया है और न ही स्थानीय लोगों की कोई कमेटी बनाकर रेसक्यू टीमों का गठन किया गया है। इस बारे मंे उपमंडल की अधिकांश पंचायतों के प्रधानों ने अनभिज्ञता जताई है। पंचायत उपप्रधान धिरड़ विक्रम सिंह, पंचायत उपप्रधान बधानी विनोद डोगरा, पंचायत उपप्रधान धमरोल विपिन कुमार, पंचायत प्रधान जाहु राजू, उपप्रधान पपलाह सुरेंद्र कुमार इत्यादि ने बताया कि इस बार अभी तक प्रशासन ने बरसात की आपदा को लेकर अभी तक कोई कमेटी या प्रबंध नहीं किया है। लोगों का कहना है कि भोरंज की खड्डें इस बार भी यदि उफान पर आती हैं, तो बिना तैयारी के कैसे जान-माल की सुरक्षा होगी। इस बारे बीडीओ सुजानपुर अतिरिक्त कार्यभार भोरंज कीर्ति चंदेल ने बताया कि पुरानी कमेटियां बनी हैं उन्हें जिला मुख्यालय में आपदा से निपटने का प्रशिक्षण दिया गया है। उन्हें बरसात में आपदा प्रबंधन को लेकर हिदायतें दी गई हैं और प्रशासन आपदा से निपटने को तैयार है। आपदा को लेकर सारी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं।

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