गुरबत-शिक्षा की कमी से बढ़े बाल शोषण अपराध

चाईल्ड लाइन सिरमौर के 1098 से प्राप्त हुए मामलों में उजागर हुआ विश्लेषण

नाहन -जागरूकता और शिक्षा की कमी तथा गुरबत की जिंदगी ने जिला सिरमौर में बाल विवाह, बाल शोषण, बाल श्रम जैसे मामलों में बढ़ौतरी हुई है जो कि चिंतनीय विषय इसलिए भी है कि इन मामलों में कानूनी कार्रवाई से पूर्व ही इन मामलों को आपसी समझौता से दबा दिया जाता है। वहीं स्थानीय निकायों की भूमिका प्रभावी न होने के चलते इन मामलों में ठोस कार्रवाई नहीं हो पाती है, मगर अब चाईल्ड हेल्पलाइन के जिला में प्रभावी होने से इन मामले में कार्रवाई भी सामने आ रही है। 1098 के माध्यम से ऐसे मामलों को लोग चाईल्ड लाइन के माध्यम से अवगत करवा रहे हैं। चाईल्ड लाइन सिरमौर के आंकड़ों पर गोर करें तो पाया गया है कि जिला में चाईल्ड मैरिज, बाल श्रम, चाईल्ड अब्यूज, यौन शोषण, भिक्षावृत्ति इत्यादि के मामले 1098 के माध्यम से सामने आए हैं। चाईल्ड लाइन के माध्यम से सामने आए जिला सिरमौर में ऐसे मामले मंे जब कारणों का विश्लेषण देखा गया तो सामने आया है कि जिला के ग्रामीण क्षेत्रों मंे शिक्षा की कमी, ड्राप आउट लड़कियां इन मामलों का शिकार हो रही हैं। वहीं अभिभावकों के इन मामलों में गंभीरता न दिखाने से मामले बढ़ रहे हैं। अधिकतर मामले चाईल्ड लाइन के हस्तक्षेप के बाद ही सामने आए हैं। चाईल्ड लाइन सिरमौर की समन्वयक विनिता ठाकुर ने बताया कि ऐसे मामलों में गरीब परिवारों में सबसे अधिक मामले सामने आते हैं। हालत यह होती है कि ऐसे घरों का माहौल बिलकुल भी बढ़ते हुए लड़कियों और बच्चों के लिए उचित नहीं होता है। माता-पिता और पूरा परिवार एक ही कमरे में रहता है, जिसके संस्कार बढ़ते हुए बच्चे-बच्चियों पर पड़ते हैं। चालू वर्ष के आंकड़ों पर गोर किया जाए तो जिला सिरमौर में चाईल्ड अब्यूूज के 149 मामले  1098 के माध्यम से चाईल्ड लाइन को प्राप्त हुए, जिसमंे 10 मामले नाबालिगों के साथ यौन शोषण के थे जिसमें सभी 10 मामलों में चाईल्ड लाइन के माध्यम से एफआईआर दर्ज हुई। वहीं चाईल्ड अब्यूज में अधिकतर मामलों में बच्चों के साथ स्कूली अध्यापकों द्वारा मारपीट, माता-पिता द्वारा मारपीट इत्यादि के भी सामने आए हैं। यही नहीं चालू वर्ष में अब तक जिला सिरमौर में बाल श्रम के 53 मामले चाईल्ड लाइन के पास 1098 के माध्यम से आए हैं, जिनमें प्रवासी बच्चे बाल श्रम के तहत पाए गए जिनकी काउंसलिंग करवाकर अभिभावकों को चाईल्ड लाइन द्वारा सौंपा गया। बाल श्रम के मामलों में समवन्यक विनिता ठाकुर के अनुसार ढाबों, निजी फर्म, कंपनियों में बाल श्रम के बच्चे पाए गए। चाईल्ड लाइन के  माध्यम से सामने आए मामलों मंे बच्चों में नाबालिग शिकार हुए बच्चे गरीब परिवारों से संबंधित ही हैं। वहीं बाल विवाह और बाल शोषण मामले में अभिभावकों और स्थानीय निकायों की भूमिका भी सहयोगी नहीं है जिसके चलते अधिकतर मामले बिना किसी कार्रवाई के दब रहे हैं।

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