घर में आ धमके लंगूर ने धमकाया

शिमला—राजधानी में बंदरों के बाद अब खूंखार लंगूरों का आतंक शुरू हो गया है। हालांकि बंदरों का आतंक यहां सदियों से है, लेकिन अब लंगूर भी लोगों के घरों में जबरन घुस रहे हैं। सोमवार को ऐसा ही मामला प्रकाश में आया। बेम्लोई क्षेत्र में दोपहर बाद एक खूंखार लंगूर एक घर में घुसा। इस लंगूर से सहमे लोगों में अफरा-तफरी मच गई। लोगों ने लंगूर को घर से बाहर निकालने के लिए कुर्सी सहित अन्य फर्नीचर का प्रयोग किया। इस दौरान कोई जान-माल का नुकसान नहीं हुआ। गौरतलब है कि शिमला में खूंखार बंदरों को मारने के लिए दो बार केंद्र सरकार से अनुमति भी मिल चुकी थी, लेकिन एक भी बंदर नहीं मारा गया। बताया जा रहा है कि बंदरों की संख्या कम होने की स्थिति में खूंखार लंगूरों का आतंक भी कम हो जाता है। वन विभाग की वाइल्ड लाइफ विंग से मिली जानकारी के मुताबिक बंदरों के साथ-साथ लंगूरों से निपटने के लिए नया तरीका अपनाया जाएगा। इसके लिए वन विभाग यूपी और राजस्थान से दो टीमें आमंत्रित करेगा, जो बंदरों एवं लंगूरों के ग्रुप और उनके रहने का प्रमुख अड्डा को खत्म करेगी। हालांकि पिछले दो सालों से नगर निगम शिमला सहित प्रदेश की 38 तहसीलों में बंदरों को मारने की अनुमति दी गई थी, लेकिन एक भी बंदर नहीं मारा गया। ऐसे में अब वन विभाग ने नया तरीका तलाश लिया है। यूपी और राजस्थान से आने वाली टीम शिमला सहित प्रदेश के अन्य शहरों में बंदर और लंगूरों के ग्रुप को खत्म कर उन्हें किसी दूसरे स्थान पर ले जाएगी। प्राप्त जानकारी के मुताबिक 2015 में हुई गणना के मुताबिक प्रदेश में दो लाख सात हजार बंदर हैं, जिसमें से एक लाख 70 हजार बंदरों की नसबंदी हो चुकी है। बताया गया कि पिछले साल 20 हजार बंदरों की नसबंदी हुई। इस बार भी वन विभाग ने 20 हजार बंदरों की नसबंदी का टारगेट फिक्स किया है। वन विभाग ने राजधानी शिमला में लोगों को बंदरों के आतंक से निजात दिलाने के लिए नौ मंकी वॉचर्स तैनात किए थे। हैरानी इस बात की है कि इन मंकी वॉचर्स ने एक भी बंदर नहीं मारा।

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