जाधव-कार्तिक पर गिर सकती है गाज

लंदन – भारत के कमजोर मध्यक्त्रम में आमूलचूल बदलाव की संभावना है और ऐसे मे अगले साल होने वाले विश्व टी-20 को ध्यान में रखते हुए केदार जाधव और दिनेश कार्तिक जैसे कामचलाऊ विकल्पों को टीम से बाहर किया जा सकता है। महेंद्र सिंह धोनी ने जब से कप्तानी संभाली थी, तब से एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय विश्वकप के लिए कम से कम दो साल और टी-20 के लिए लगभग 18 महीने पहले से टीम तैयार करने की नीति चल रही है। सीमित ओवरों का भारत का अगला बड़ा टूर्नामेंट आस्ट्रेलिया में अगले साल होने वाला विश्व टी-20 होगा, जो चार साल बाद हो रहा है। एमएसके प्रसाद की अगवाई वाली चयन समिति बीसीसीआई के चुनाव होने तक प्रभारी रहेगी लेकिन उम्मीद है कि बदलाव के दौर में भी यही समिति जिम्मेदारी संभालेगी, जिसमें अगले 14 महीने में ध्यान सबसे छोटे प्रारूप पर अधिक होगा। जाधव और कार्तिक जैसे कामचलाऊ खिलाडि़यों की मौजूदगी वाला भारत का कमजोर मध्यक्रम उपमहाद्वीप के बाहर के हालात में दबाव की स्थिति से निपटने में सक्षम नहीं था। यह मौजूदा टीम की सबसे बड़ी कमजोरी थी और विश्वकप सेमीफाइनल जैसे नतीजे की आशंका सभी को थी।

मिडिल आर्डर में कई आजमाए, सब फेल

पिछले वर्ल्डकप के बाद भारतीय टीम ने चौथे क्रम पर अजिंक्या रहाणे, अंबाती रायुडू, दिनेश कार्तिक, केदार जाधव, श्रेयस अय्यर व विजय शंकर को चौथे और पांचवें नंबर पर फिट करने की कोशिश की। रायुडू तो पिछले चार साल में 26 मुकाबलों में खेले। उन्होंने 56.68 की औसत से 907 रन भी बनाए, लेकिन वर्ल्डकप टीम में उन्हें शामिल नहीं किया गया। उनकी जगह विजय शंकर को इंग्लैंड ले जाया गया, लेकिन वह तीन मैच में 29 की औसत से 58 रन ही बना सके। बीच टूर्नामेंट में चोटिल होकर बाहर हो गए। उनकी जगह ऋषभ पंत को टीम में शामिल किया, लेकिन वह भी बड़ी पारी खेलने में नाकाम रहे। यहां तक की कोई भी बल्लेबाज चौथे नंबर पर पचासा तक नहीं जमा पाया।

You might also like