ज्योग्राफी में बनाएं करियर

सृष्टि के आरंभ से ही मनुष्य का भूगोल से वास्ता रहा है। भूगोल, मानव जाति जितना ही पुराना है। पृथ्वी पर अपने अस्तित्व के प्रारंभिक काल से ही मनुष्य को अपने पर्यावरण, भोजन और आवास के लिए गंभीरता से विचार करना पड़ता था…

एक ऐसा स्वतंत्र विषय है, जिसका उद्देश्य लोगों को इस विश्व का, आकाशीय पिंडों का, स्थल, महासागर,जीव-जंतुओं, वनस्पतियों तथा भू-धरातल पर देखी जाने वाली प्रत्येक वस्तु का ज्ञान प्राप्त करवाना है। सृष्टि के आरंभ से ही मनुष्य का भूगोल से वास्ता रहा है। भूगोल, मानव जाति जितना ही पुराना है। पृथ्वी पर अपने अस्तित्व के प्रारंभिक काल से ही मनुष्य को अपने पर्यावरण, भोजन और आवास के लिए गंभीरता से विचार करना पड़ता था। भूगोल, पृथ्वी पर उपस्थित विभिन्न स्थलों की जानकारी देता है। भूगोल धरातल पर पाए जाने वाले विभिन्न तथ्यों का अध्ययन करता है। सबसे ज्यादा प्रायोगिक और मजेदार विषयों में एक है ज्योग्राफी यानी कि भूगोल। भूगोल को पृथ्वी का विज्ञान कहा जाता है। इसके अंतर्गत धरती एवं उसके आसपास पाए जाने वाले तत्वों का अध्ययन किया जाता है। सही मायने में देखा जाए तो ज्योग्राफर की भूमिका एक साइंटिस्ट की भांति होती है। अगर आपने आर्ट्स में भूगोल विषय लेकर 12वीं पास की और आप समझ नहीं पा रहे हैं कि अपने करियर को किस तरह आगे बढ़ाया जाए तो हम आपको बता रहे हैं कि आप भूगोल ऑनर्स में ग्रेजुएशन कर अपने करियर को नई दिशा दे सकते हैं। भूगोल एक ऐसा विषय में जिसमें अलग-अलग देशों, जलवायु, जंगलों, पहाड़ों, नदियों के बारे में विस्तार से बताया जा सकता है। अगर आप इसमें पढ़ाई करेंगे तो आपको कभी भी बोरियत महसूस नहीं होगी। आप इस धरती से जुड़ा कुछ नया जानना चाहते हैं तो भूगोल ऑनर्स आपके लिए सबसे ज्यादा बेस्ट कोर्स है। इसमें बैचलर से लेकर पीएचडी लेवल तक के कोर्स मौजूद हैं। छात्र बारहवीं के बाद अपनी किस्मत आजमा सकते हैं। बीएबीएससी में दाखिला बारहवीं के बाद और एमएससी में दाखिला स्नातक के बाद मिलता है। इसके बाद पीएचडी की राह आसान हो जाती है। पीजी डिप्लोमा भी स्नातक के बाद किया जा सकता है। इसमें कई सर्टिफिकेट कोर्स भी हैं, जिन्हें स्नातक के बाद किया जा सकता है। इसमें रेगुलर व पत्राचार, दोनों तरह के कोर्स मौजूद हैं।

कैसे करें कोर्स

इसमें बैचलर से लेकर पीएचडी लेवल तक के कोर्स मौजूद हैं। छात्र बारहवीं के बाद अपनी किस्मत आजमा सकते हैं। बीएए बीएससी में दाखिला बारहवीं के बाद और एमएससी में दाखिला स्नातक के बाद मिलता है। इसके बाद पीएचडी की राह आसान हो जाती है। पीजी डिप्लोमा भी स्नातक के बाद किया जा सकता है। इसमें कई सर्टिफिकेट कोर्स भी हैं, जिन्हें स्नातक के बाद किया जा सकता है। इसमें रेगुलर व पत्रचार दोनों तरह के कोर्स मौजूद हैं। देश के बहुत से संस्थान भूगोल में ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स करवाते हैं। कुछ संस्थान एंट्रेंस के बाद एडमिशन देते हैं तो कुछ 12वीं के अंकों के हिसाब से एडमिशन देते हैं। आप अंडर ग्रेजुएट कोर्स, बीए इन ज्योग्राफी और बीए ऑनर्स इन ज्योग्राफी जैसे कोर्स कर सकते हैं और पोस्ट ग्रेजुएशन में पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स इन ज्योग्राफी और मास्टर ऑफ  इन ज्योग्राफी जैसे कोर्स भी कर सकते हैं।

प्रमुख कोर्स एवं अवधि

* बीएबीएससी ज्योग्राफी-3 वर्ष

* एमएससी -ज्योग्राफी -2 वर्ष

* एमएससी -ज्योइंफॉर्मेटिक्स-2 वर्ष

* पीएचडी -ज्योग्राफी -2 वर्ष

* पीएचडी -ज्योमैग्नेटिज्म -2 वर्ष

* पीजी सर्टिफिकेट कोर्स इन ज्योइंफॉर्मेटिक्स एंड रिमोट सेंसिंग -छह माह

* पीजी डिप्लोमा इन ज्योग्राफिकल काटरेग्राफी -एक वर्ष

रोजगार की संभावनाएं

सफलतापूर्वक कोर्स करने के बाद इस क्षेत्र में रोजगार की कोई कमी सामने नहीं आती। सेटेलाइट टेक्नोलॉजी और ज्योग्राफिकल इंफॉर्मेशन सिस्टम जीआईएस, के प्रयोग में बढ़ोतरी के चलते संबंधित कोर्स और प्रोफेशनल्स की डिमांड भी बढ़ी है। इसमें सरकारी व प्राइवेट, दोनों क्षेत्रों में काम की प्रचुरता है। इसके अलावा एनजीओ, ज्योग्राफिकल सर्वे ऑफ इंडिया, मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट, रिसर्च इंस्टीटच्य़ूट, स्कूल-कॉलेज, मैप पब्लिशर व ट्रेवल एजेंसियां अपने यहां योग्य लोगों को जॉब देती हैं। प्रोफेशनल्स चाहें तो फ्रीलांसर व कंसल्टेंट के अलावा विदेश जाकर अपनी क्षमता आजमा सकते हैं।

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