ढोल-नगाड़े-शंख की ध्वनियों से गूंज उठी देवभूमि

कुल्लू—देवभूमि कुल्लू के मंदिरों में सावन की संक्रांति को बड़ी धूमधाम के साथ मनाया गया। मंदिरों में जहां पहले देव कारकूनों द्वारा देव रिवायत को बखूबी से निभाया। वहीं, इसके बाद मंदिरों में देवी-देवताओं का आशीर्वाद लेने के लिए सुबह से शाम तक हारियानोंे के साथ-साथ दूर दराज से आए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। वहीं, अब कई मंदिरों में पूरे सावन मास में खीर भंडारे का आयोजन भी चलेंगे। बता दें कि मंगलवार को सावन मास की संक्रांति  की बेला पर सुबह मंदिरों में पूजा-अर्चना का दौर चला। देवधूनों में ढोल-नगाड़े के साथ-साथ घंटी और शंख की ध्वनियों से देवभूमि गूंज उठी। बता दें कि धार्मिक नगरी मणिकर्ण घाटी में सावन संक्रांति को अलग ही अंदाज में मनाया जाता है। इसी बार भी सदियों पुरानी देव परंपरा के कई श्रद्धालु साझी बने। बता दें कि डढ़ेई गांव देवता सुननारायण और देवता अठारहपेड़ के सम्मान में सावन संक्रांति को बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने देव पूछ भी डाली। इसके बाद घाटी के नमो नारायण के मंदिर में भी सावन संक्रांति की परंपरा को मुख्य कारकूनों सहित अन्य हारियानों ने बखूबी से निभाया। यही नहीं देवभूमि कुल्लू के बिजली महादेव, लगवैली, अप्पर वैली, शमशी, खोखण के साथ-साथ मणिकर्ण घाटी, सैंज घाटी, बंजार, आनी में सावन संक्रांति को धूमधाम से मनाया गया।  इस दौरान देवभूमि कुल्लू के लोगों ने अपने-अपने आराध्य देवी-देवताओं से सुख-शांति की कामना की। वहीं, सावन संक्रांति के साथ ही शाढ़नू मेलों का आगाज भी हुआ। खोखण में देवता आदिब्रह्मा और वीरनाथ(गौहरी) के सम्मान में शाढ़नू मेले को मनाया जाएगा। मेले के आयोजन को लेकर हारियानों ने तैयारियां पूरी कर दी है। देवता आदिब्रह्मा क्षेत्र की परिक्रमा करेंगे। बता दें कि आदिब्रह्मा के हारियानों को साढ़नू मेले का बेसब्री से इंतजार होता है।  वहीं, बंजार घाटी के देवी-देवता भी रथों में विराजमान होकर श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देंगे। लिहाजा, बंजार घाटी में भी मेले को बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।

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