थाना कसौगा में बीपीएल लिस्ट पर हंगामा

श्रीरेणुकाजी—सैनधार के ग्राम पंचायत थाना कसौगा में बीपीएल परिवारों के चयन को लेकर काफी गहमा-गहमी रही। रविवार को पंचायत में बीपीएल परिवारों के चयन को लेकर एक बैठक की गई, जिसमें बीपीएल परिवारों का गठन किया गया। लोगों का आरोप है कि बीपीएल परिवारों का पटवारी, पंचायत सचिव व सिलाई टीचर ने घर-घर जाकर सर्वे नहीं किया, जिसके चलते कई गरीब परिवार  बीपीएल सूची में आने से वंचित रह गए। लोगों ने पटवारी सुरेंद्र सिंह पर आरोप लगाया है कि वह अपनी मनमानी से काम कर रहा है। लोगों को डरा धमका रहा है। लोगों को यहां तक कह रहा है कि जो मैंने कर दिया है वह ठीक है। फाइल फिर भी मरे पास ही आनी है जिससे लोगों में पटवारी के प्रति गुस्सा भड़क गया। ग्रामीण प्रेम चंद, टेक राम, दिलीप कुमार, अरविंद कुमार, ओम प्रकाश, दौलत राम, नीमा शर्मा आदि ने आरोप लगाया कि ग्राम पंचायत थाना कसौगा में कमेटी ने बीपीएल परिवारों का गलत चयन किया गया है, जबकि ग्राम सभा इन लोगों को बीपीएल में नहीं डालना चाहती थी। लोगों का आरोप है कि ग्राम सभा के रजिस्टर में लोगों के पहले हस्ताक्षर करवा लिए गए, जबकि कार्रवाई कोरम पूरा होने के बाद भी नहीं लिखी गई। उन्होंने इस बारे में उपायुक्त सिरमौर को भी शिकायत पत्र भेजा है। हालांकि इस बैठक में कोरम पूरा हो गया है। इस बैठक में पंचायत द्वारा जो सर्वे कमेटी द्वारा सिफारिश की गई है जनरल हाउस में उसी सिफारिश को मनमाने ढंग से पारित किया गया है। लोगों का आरोप है कि सर्वे कमेटी द्वारा सही सर्वे नहीं किया गया है। यह सर्वे पूरा गलत है। लोगों ने डीसी सिरमौर से मांग की है कि ग्राम पंचायत थाना कसौगा का सर्वे दोबारा करवाया जाए और जो चयन पंचायत ने किया है उसकी पूरी छानबीन की जाए। इस पंचायत में 60 प्रतिशत व्यक्तियों का गलत चयन किया गया है। लोगों ने आग्रह किया कि इसका दोबारा सर्वे किया जाए। जनरल हाउस में बीपीएल सूची पर लोगों की बात नहीं मानी गई है। कमेटी का सर्वे जो गलत है ग्राम सभा को उसी सर्वे को मानने के लिए बाध्य किया गया जो कि ग्रामसभा के मूल अधिकारों का हनन है, जबकि कमेटी सर्वे करने नहीं गई है। लोगों ने उपायुक्त सिरमौर से आग्रह किया है कि इसका सर्वे दोबारा करवाया जाए। ग्राम सभा को रद्द किया जाए तथा दोषी कमेटी के अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाए।

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