दुर्गा सहस्रनाम स्तोत्रम्

-गतांक से आगे…

कोटिचंद्रप्रतीकाशा कूटजालप्रमाथिनी।

कृत्याप्रहारिणी चैव मारणोच्चाटनी तथा।। 146।।

सुरासुरप्रवंद्याङ्घ्रिर्मोहघ्नी ज्ञानदायिनी।

षड्वैरिनिग्रहकरी वैरिविद्राविणी तथा।। 147।।

भूतसेव्या भूतदात्री भूतपीडाविमर्दिका।

नारदस्तुतचारित्रा वरदेशा वरप्रदा।। 148।।

वामदेवस्तुता चैव कामदा सोमशेखरा।

दिक्पालसेविता भव्या भामिनी भावदायिनी।। 149।।

स्त्रीसौभाग्यप्रदात्री च भोगदा रोगनाशिनी।

व्योमगा भूमिगा चैव मुनिपूज्यपदाम्बुजा।

वनदुर्गा च दुर्बोधा महादुर्गा प्रकीर्तिता।। 150।।

फलश्रुति

इतीदं कीर्तिदं भद्र दुर्गानामसहस्रकम्।

त्रिसंध्यं यः पठेन्नित्यं तस्य लक्ष्मीः स्थिरा भवेत्।। 1।।

ग्रहभूतपिशाचादिपीडा नश्यत्यसंशयम्।

बालग्रहादिपीडायाः शांतिर्भवति कीर्तनात्।। 2।।

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