दे पदानन, ले मनामन

अशोक गौतम

साहित्यकार

आखिर भगवान ने उनको कल मेरे यहां पता नहीं कहां से भेज दिया मेरी सहायता के लिए, सच कहूं उस वक्त वे सडे़-फडे़ होने के बावजूद मेरे लिए किसी फरिश्ते से कम न लगे। बातों ही बातों में मैंने उन्हें अपनी सरकारी दफ्तरों की नाकामयाबियों के बारे में बताया, तो वह मुस्कुराते हुए बोले- यार, हमसे पूछ लेते कि सरकारी ऑफिसों में काम कैसे होते हैं। ‘मतलब! तुम्हारे पास क्या सरकारीदीन का चिराग है, मैंने गंभीर होकर पूछा, तो वह बोले- कुछ ऐसा ही सोच लो। किसी को बताना मत, जो सच मैं तुमसे कह रहा हूं। यह सच ऐसा है, जो कृष्ण ने अर्जुन से भी नहीं कहा था और वह सच यह है कि मैंने रिश्वत प्रबंधन में एक नामी-गिरामी सरकारी इंस्टीच्यूट से बैचलर समय में बैचलर कर रखी है।’ उन्होंने कहा तो मेरा मुंह खुला का खुला रह गया। बैचलर समय में बैचलर? हां, और वह भी मैरिट के साथ। अपने समय में मैं रिश्वत प्रबंधन की डिग्री में टॉपर था। उसके बाद बहुत सी प्राइवेट फर्मों में सरकारी ऑफिसों से काम करवाने के लिए रिश्वत दे ईमानदारी से काम किया, पर अब… उन्होंने कहा तो मैं चुप। मुझे बड़ी देर तक चुप देख वह बोले- जिस तरह से दूसरे प्रबंधनों में डिग्री होती है, उसी तरह रिश्वत प्रबंधन में भी सरकार ने डिग्री करवानी शुरू कर दी है। इस डिग्री को करने के बाद बंदे को रिश्वत लेना आए या न आए, परंतु रिश्वत देकर चुटकियों में काम करवाने, निकालने का हुनर बड़ी अच्छी तरह से आ जाता है। ‘मतलब?’ चलो मैं अपनी डिग्री को प्रैक्टिकली बताता हूं। कहीं तुम्हारा कोई काम अटका है क्या? ‘अटका क्या, अटके पड़े हैं’। बीस चक्कर तो कुत्ते के डेथ सर्टिफिकेट लेने के लिए म्युनिसिपलिटी के लगा चुका हूं। इसी सिलसिले में एक को तो कुत्ते की तरह भौंकते हुए पांच सौ रुपए दिए भी। बिन खाए, तो वह कुत्ते का डेथ सर्टिफिकेट देने से गधे की तरह बिदक ही रहा था, पर खाकर भी वह दुल्लती मार गया। मैंने मन की पीड़ा कही, तो वह बोले- ऐसे काम नहीं होते दोस्त! रिश्वत मैनेजमेंट कहता है कि सभी के हिस्से की रिश्वत एक को कभी मत दो। उसे चरणबद्ध तरीके से सबको दो, जहां-जहां से फाइल को गुजरना होता है। अगर ऐसा न करो, तो फाइल तो फाइल, फाइल के मालिक के गुजर जाने के भी पूरे आसार रहते हैं। भैयाजी! रोटी खाने को किसी के पेट अलग-अलग हों या न, पर रिश्वत खाने को पेट सबके अलग-अलग होते हैं। इसलिए सबको पद के अनुसार जहां-जहां से फाइल को गुजरना हो, रिश्वत दो, तो भला काम कैसे न हो? उन्होंने मुझे दो मिनट में जन्मों का संचित रिश्वत प्रबंधन का व्यावहारिक ज्ञान दिया और मेरे जैसे दूसरे अज्ञानियों को रिश्वत के मामले में सेंसेटाइज करने आगे हो लिए, रिश्वत प्रबंधन का मुराड़ा दिमाग में लिए।

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