धर्मशाला-शिमला फोरलेन पर ब्रेक

केंद्रीय मंत्रालय ने दिए आदेश, टेंडर खुलने की संभावना कम

शिमला – पिछले सवा साल से डिब्बे में कैद धर्मशाला-शिमला फोरलेन परियोजना के टेंडर के खुलने की संभावना कम हो गई है। केंद्रीय मंत्रालय ने इस फोरलेन प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य को ब्रेक देने के आदेश दिए हैं। इसके चलते परियोजना में तैनात एनएचएआई के अधिकारियों ने दूसरी जगह पोस्टिंग की ऑप्शन दी है। परियोजना का कांगड़ा से लेकर ज्वालाजी के बीच 40 किलोमीटर सड़क का टेंडर 25 अप्रैल, 2018 को खुलना था। करीब 15 माह के बाद भी इसका टेंडर बॉक्स में बंद पड़ा है। अब यकायक मंत्रालय ने इस परियोजना का निर्माण कार्य की प्रक्रिया धीमी करने को कहा है। उल्लेखनीय है कि पहले चरण में कछियारी-ज्वालामुखी के बीच निर्माण कार्य के लिए हुए टेंडर की एस्टीमेट कॉस्ट 300 करोड़ बढ़ गई थी। नेशनल हाई-वे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (न्हाई) ने 40 किलोमीटर के फोरलेन के लिए मार्च 2018 में टेंडर कॉल किया था। पहले चरण में 900 करोड़ का यह टेंडर 25 अप्रैल, 2018 को खुलना था। इसके बाद समेला-कांगड़ा के बीच डीपीआर निर्माण में कई बार एलाइनमेंट बदली जा चुकी है। इसके चलते इसकी अनुमानित लागत 900 करोड़ से बढ़ कर 1200 करोड़ पहुंच गई है। बताते चलें कि 223 किलोमीटर लंबे धर्मशाला-शिमला फोरलेन के निर्माण कार्य को न्हाई ने पांच चरणों में विभाजित किया है। हालांकि फोरलेन निर्माण के बाद शिमला-धर्मशाला की दूरी घटकर 203 किलोमीटर रह जाने का अनुमान है। इसके चलते न्हाई ने 40 किलोमीटर लंबे सड़क मार्ग का फेज बनाया है। इसी प्रक्रिया के तहत पहले चरण में कछियारी से ज्वालामुखी के बीच 40 किलोमीटर फोरलेन निर्माण के लिए टेंडर कॉल किए गए। सियासी खींचतान के चलते समेला से लेकर कछियारी तक चार-पांच बार एलाइनमेंट बदल जा चुकी है। शुरूआती प्रक्रिया में इसकी डीपीआर कछियारी से मौजूदा बाइपास होकर तैयार की थी। अब समेला की पहाड़ी को काट कर कांगड़ा टनल से सीधा आगे कांगड़ा रेलवे स्टेशन तक पहुंचाया गया है। इसके बाद बाण गंगा मंदिर से टांडा मेडिकल कालेज होकर सड़क को कछियारी से जोड़ा गया है। एलाइनमेंट के इस फेर में अब पहले फेज की ही लागत 300 करोड़ बढ़ गई है।

नितिन गडकरी ने की थी घोषणा

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की घोषणा के बाद पठानकोट-मंडी और धर्मशाला-शिमला फोरलेन के निर्माण कार्य की कसरत आरंभ हुई थी। शुरूआती दौर में डीपीआर बनाने से लेकर टेंडर प्रक्रिया तक का सारा काम युद्ध स्तर पर हुआ है। इसी कारण मार्च, 2018 में शिमला-धर्मशाला फोरलेन में पहले फेज के लिए टेंडर कॉल कर लिए थे। 

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