नित्य सुख देने वाला है परमात्मा का प्रेम

ऊना—भगवान की कथा संस्कारों की जननी है। यह हमें अनेक दैवीय सद्गुणों से भर देती है। मानव जीवन का कल्याण जितना भगवान की कथा से होता है उतना अन्य साधनों से नहीं। भगवान शिव का का आश्रय सभी विपत्तियों का नाशक है। यह शब्द ऊना की रक्कड़ कालोनी बिजली बोर्ड कांप्लेक्स शिव मंदिर में शिव महापुराण कथा के दौरान अतुल कृष्ण जी महाराज ने कहे। उन्होंने कहा कि हम सभी को पंचाक्षर मंत्र का जप अव्यय करना चाहिए। शिव भक्त अपने -ले में रुद्राक्ष एवं मस्तक पर भस्म धारण कर ही पूजन करें। इसके बिना पूजा का फल आधा हो जाता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को नित्य सुख देने वाला परमात्मा का प्रेम ही है। हम भगवान के हैं और भगवान हमारे हैं इस तथ्य का नित्य ही अभ्यास करना चाहिए। आत्म भांति के समक्ष व्यिव के समस्त वैभव तुच्छ हैं। मनुष्य को ऐसे कार्यों से सदैव दूर रहना चाहिए, जिसमें विवेक का उपयोग न होता हो। मंगलवार को कथा में देवी सती की महिमा, वीरभद्र द्वारा दक्ष-यज्ञ, महाराज हिमाचल के यहां देवी पार्वती का जन्म, भगवान शिव का कामदेव को भस्म करना, पार्वती जी का भगवान शिव की प्राप्ति के लिए तपस्या करना, भगवान शिव को विवाह के लिए देवताओं की प्रार्थना एवं शिव-पार्वती विवाह का प्रसंग सभी ने श्रद्धा से सुना।

 

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