बच्चों को सिखाएं शिष्टाचार

Jul 20th, 2019 12:03 am

बहुत से पेरेंट्स की शिकायत रहती है कि वह दूसरों के सामने बच्चों की जब तारीफ  करते हैं, उसी समय बच्चा कोई न कोई ऐसी हरकत करता है कि माता-पिता को शर्मिंदगी उठानी पड़ती है। ऐसी सिचुएशन से बचने के लिए क्यों न बच्चे को शुरू से ही शिष्टाचार से रू-ब-रू करवाया जाए…

बहुत से पेरेंट्स की शिकायत रहती है कि वह दूसरों के सामने बच्चों की जब तारीफ  करते हैं, तो उसी समय बच्चा कोई न कोई ऐसी हरकत करता है कि माता-पिता को शर्मिंदगी उठानी पड़ती है। ऐसी सिचुएशन से बचने के लिए क्यों न बच्चे को शुरू से ही शिष्टाचार से रू-ब-रू करवाया जाए। माता-पिता बच्चों के पहले शिक्षक होते हैं। माता-पिता से बेहतर कोई और नहीं सिखा सकता। अतः पेरेंट्स भी कोशिश करें कि वे अपने बच्चों को शुरू से ही शिष्टाचार सिखाएं। जब घर में मेहमान आएं, तो बच्चों को सिखाएं कि वह उस समय मुस्कराकर मेहमान का अभिनंदन करें। न कि अपने काम या खेल में व्यस्त रहें। बच्चों को सिखाएं कि वे बड़ों की बातों को ध्यान से सुनें। मेहमान के आने पर उनको इग्नोर न करें। यह उनके प्रति आदर दिखाने का एक तरीका है। अपने बच्चों को हैलो या हैंडशेक करना सिखाएं। आने वाला मेहमान बच्चों से ज्यादातर हैंडशेक करना पसंद करता है। उन्हें करीबी रिश्तोदारों  के पैर छूने या नमस्ते करने की आदत डालें। बच्चे को अदब के साथ ‘नाइस टू मीट यू’ या आपसे मिलकर खुशी हुई, मान सिखाएं। बच्चे के एटिकेट्स देखकर उनको भी बहुत अच्छा लगेगा। मेहमान भी आपके द्वारा दिए गए अच्छे संस्कारों की प्रशंसा किए बगैर नहीं रह पाएंगे। बच्चे को समझाएं फोन पर किस तरह से बात की जाती है। किसी वयस्क की आवाज सुनने पर उनको पहले नमस्ते कहना है, यह भी बताएं उसके बाद रिक्वेस्ट करते हुए कहे, क्या मैं अपने दोस्त या अमुक व्यक्ति से बात कर सकता हूं या सकती हूं। वयस्क हो या बच्चे, लेकिन सबके लिए दो शिष्टाचारी शब्द अपने आप में बहुत बड़े हैं। वह है प्लीज और थैंक यू! यानी कृपया और धन्यवाद। इन दो शब्दों का उपयोग सामने वाले के मन में आपको एक सम्मानित स्थान दिलाता है।

हम खुश होकर अपने बच्चे की बड़ाई करते हैं, लेकिन बच्चे को यह सिखाना भूल जाते हैं कि सामने वाले को मुस्कराकर जवाब देना है। न कि उनके किसी सवाल पर चुप्पी साध लेना। जब भी कोई बच्चों से पूछे, आप कैसे हो? तो वह मुस्कराकर इस बात का जवाब दे और वह भी उनसे पूछें कि वे कैसे हैं? कई बार बच्चे अपने दोस्तों के घर जाते हैं, लेकिन वहां से वापस आते समय दोस्त के पेरेंट्स को थैंक्स कहना भूल जाते हैं या कहिए कि उन्हें आदत ही नहीं होती। बच्चों को समझाएं यह छोटी-छोटी बातें उनको पहचान दिलाएंगी। ध्यान रखने और खाने-पीने की चीजें देने के लिए धन्यवाद अवश्य कहना चाहिए। कोशिश करें जब भी दो बड़े बात कर रहे हैं, तो बच्चे उस कन्वर्सेशन का हिस्सा न हो। न ही वह बीच में बोलें। बच्चों को प्यार से समझाएं कि जब बड़े बातें कर रहे हैं, आप अपना जाकर खेलें। यदि खेलने की जगह नहीं है, तो चुपचाप बैठें।

बच्चों को बताएं कि गाली देना अच्छी बात नहीं है। यदि आप भी गुस्से में किसी को गाली दे रहे हैं, तो बच्चों का ख्याल रखें। बच्चा यदि अपशब्दों का प्रयोग कर रहा है, तो उसे प्यार से समझाएं और यदि वह प्यार से नहीं समझ रहा, तो डांट कर समझाएं कि गाली देना बुरी बात है। बच्चों को अपने शिक्षण संस्थान में किस तरह व्यवहार करना है समझाएं। बच्चों को बताएं कि जब भी शिक्षक से बात करें तो हाथ हमेशा पीछे रखें और सीधे खड़े होकर बात करें। अगर शिक्षक उनकी कोई समस्या सुलझाता है, तो उन्हें सबसे पहले थैंक यू कहें फिर कोई और बात करें।

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