बशौणा में काहिका मेले का आगाज

भुंतर—जिला की रूपी घाटी के बशौणा में मनाए जाने वाले ऐतिहासिक काहिका मेला का आगाज सोमवार को हो गया। चार दिवसीय इस देव उत्सव का आरंभ काहिके को खड़ा करने के साथ हुआ तो मेले की मुख्य गतिविधि नरमे धयज्ञ में अपनी भूमिका निभाने वाला नौड़ भी अपने पूरे परिवार के साथ यहां पहुंचा। नौड़ अपने परिवार के साथ आगामी चार दिनों तक अब देवता कपिल मुनि के दरबार में ही डेरा डाले रहेगा और मेले के समापन के बाद ही अपने घर लौटेगा। मेले का मुख्याकर्षण नरमेध यज्ञ होगा जिसमें नर बलि की प्रकिया को पूरा किया जाएगा। वन परिवहन एवं युवा सेवा व खेल मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर इसमें विशेष तौर पर शिरकत करेंगे। मेले के पहले दिन सैकड़ों देवता के हारियान देर शाम देवता के दरबार में पहुंचे। देव आदेशों के बाद सबसे पहले हारियानों ने मंदिर में माथा टेका। सभी वरिष्ठ कार कारिंदों ने काहिके, जो एक विशेष प्रकार का शामियाना होता है, को देवता भंडार से निकाला। काहिके के चारों कोनों को देवता के हारियानों ने नियमों के अनुसार बड़े-बड़े रस्सों से बांधा। इसके बाद इसे खड़ा किया गया। काहिके को खड़ाने के बाद नौड़ के परिवार व देवता के वरिष्ठ कार कारिंदों के बीच हुआ संवाद भी खूब लोगों को भाया । इसके जरिए एक दूसरे का हालचाल जाना गया तो काहिका मेले की गतिविधियों का भी आगाज हुआ। देवता कपिल मुनि के कारदार चुने राम शर्मा, कपिल मुनि विकास समिति के प्रधान निधि सिंह ठाकुर, महासचिव दविंद्र कुमार उपाध्यक्ष दुनी चंद, भंडारी अमर चंद ठाकुर, टेक सिंह ठाकुर, संजीव ठाकुर, निहर संजू, पवन कुमार, महिंद्र सिंह आदि ने बताया कि सोमवार को दैविक विधि-विधानों के साथ कार्यक्रम आरंभ हुआ।  उन्होंने बताया कि मंगलवार को दूसरे दिन देवता कपिल मुनी के रथ का सजाया जाएगा तो हारियान देवता के आशीर्वाद को यहां पर जुटेंगे और देवता से आशीष लेंगे। 17 जुलाई को 11 से तीन बजे तक लोक नृत्य और लोकगीतों का आयोजन होगा। मेले की अहम कड़ी माने जाने वाले नरमेघ यज्ञ की प्रक्रिया इसी दिन पूरी की जाएगी जिसमें नड़ को मारकर उसे पुनः जीवित किया जाएगा और इस प्रक्त्रिया के द्वारा देवता अपनी देव शक्तियों की परीक्षा देगा। मेले के अंतिम दिन 18 जुलाई को लोकनृत्य होगा। कारकूनों के अनुसार देवता के अपने शक्ति प्रदर्शन में सफल रहने की खुशी में जश्न स्वरूप यह नाटी डाली जाती है जिसमें सभी हारियान झूमते हुए जश्न मनाएंगे।

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