बिजली महादेव में गूंजे भोले के जयकारे

कुल्लू—तपोस्थली बिजली महादेव में टौर के पत्तों की पत्तल यानी पहाड़ी थाली का प्रयोग कर सावन महीने के पहले संडे को पर्यावरण बचाने का संदेश दिया गया। पत्तलों का प्रयोग करते देख पर्यावरण प्रेमी भी खुश नजर आए। वहीं, देव समाज से जुडे़ एवं बिजली महादेव के दर्शन को पहुंचे बुजुर्ग लोगों को अपना पुराना जमाना याद आया। रविवार को जब सावन महीने के पहले रविवार को गुरु-चेला संस्था टौरे के पत्ते में श्रद्धालुओं को हलवा परोस रही थी तो, माहौल देखते ही बन गया और यहां पहले संडे को पहुंचे 20 हजार से ज्यादा श्रद्धालु पर्यावरण बचाने का संदेश ले घर लौटे। इस बार बिजली महादेव मंदिर कमेटी ने तपोस्थली को साफ-सुथरा रखने के साथ-साथ पर्यावरण को कायम रखने के लिए प्लास्टिक के साथ-साथ रेडीमेड  पतलों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा रखा है। वहीं, यहां पर भंडारे का आयोजन कर रहे भक्त भी इस बार यहां पर भंडारे के दौरान थर्माेकोल की पत्तलों का प्रयोग नहीं कर रहे हैं। बता दें कि जहां पहले रविवार को गुरु-चेला संस्था ने मंडी के सुंदरनगर से टौर पेड़ों की हरे पत्ते की पतलें मंगवाकर पर्यावरण को बचाने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं को हलवा बांटा, जहां पिछले साल तक बिजली महादेव में थर्माेकॉल की पत्तलों का प्रयोग किया जाता आ रहा था, लेकिन इस बार पर्यावरण का पूरा ख्याल रखा जा रहा है। यही नहीं, पहले संडे को लोअर ढालपुर युवक मंडल ने बिजली महादेव में भंडारा लगाया और हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने भंडारा ग्रहण किया। युवक मंडल लोअर ढालपुर ने भी थालियों में श्रद्धालुओं को भंडारा परोसा। युवक मंडल ने भी हजारों श्रद्धालुओं को पर्यावरण बचाने के साथ-साथ यहां देव आस्था को कायम रखने का संदेश दिया। बिजली महादेव के दर्शन करने के लिए काफी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। बिजली महादेव के प्रांगण में भजन-कीर्तन मंडलियों ने भी भोले के जय कारे गाए। इस बार बिजली महादेव में सफाई का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। यत्न संस्था के अध्यक्ष गौरव भारद्वाज ने बताया कि वह भी रविवार को बिजली महादेव दर्शन के लिए गए थे। उन्होंने कहा कि गुरु-चेला संस्था ने जिस तरह से यहां पर टौर के पेड़ों की पत्तल में श्रद्धालुओं को हलवा बांटा तो वह बेहद खुश हुए। बिजली महादेव कमेटी के सदस्य डाबे राम ने बताया कि रविवार को काफी संख्या में श्रद्धालु बिजली महादेव पहुंचे। साथ में सफाई का ध्यान रखा गया है। थर्मोकॉल की पत्तलें बंद की हैं।

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