भारत, कुलभूषण की ‘जय हो’

नीदरलैंड्स के हेग शहर में स्थित अंतरराष्ट्रीय अदालत से ‘जिंदाबाद’ खबर आई है। जासूस करार देकर भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान की जिस फौजी अदालत ने गुपचुप फांसी की सजा सुनाई थी, उस पर अंतिम निर्णय तक रोक जारी रहेगी। यानी कुलभूषण को फिलहाल फांसी नहीं दी जाएगी। अंतरराष्ट्रीय अदालत ने मामले की प्रभावी समीक्षा और उस पर पुनर्विचार करने का आदेश भी दिया है। अब नए सिरे से केस फौजी अदालत में नहीं, बल्कि नागरिक न्यायालय में चलेगा। पाकिस्तान को दोबारा साबित करना पड़ेगा कि कुलभूषण वाकई जासूस और दोषी हैं। अब भारतीय उच्चायोग कुलभूषण की मदद कर सकेगा, राजनयिक उनसे मुलाकात कर सकेंगे और उच्चायोग वकील भी मुहैया कराएगा। अंतरराष्ट्रीय अदालत में 15-1 जजों के एकतरफा बहुमत ने यह निर्णय सुनाया। पाकिस्तानी जज ने ही विरोध किया। यह फैसला अंतरराष्ट्रीय अदालत के अधिकार-क्षेत्र में आता है। इस पर न तो पुनर्विचार हो सकता है और न ही अपील की जा सकती है। लिहाजा दबाव में पाकिस्तान को फैसला मानने पर मजबूर होना पड़ेगा। हालांकि पाकिस्तान कोई नई आपत्ति लेकर नए सिरे से याचिका दायर कर सकता है, लेकिन पाकिस्तान नए टकराव लेने की स्थिति में नहीं है। अंतरराष्ट्रीय अदालत का यह फैसला भारत और कुलभूषण जाधव के मद्देनजर गौरतलब है। वैसे अंतरराष्ट्रीय अदालत न तो किसी देश के कानून को नजरअंदाज करते हुए कोई फैसला दे सकती है और न ही कुलभूषण की रिहाई और भारत-वापसी का आदेश दे सकती थी, क्योंकि यह उसके अधिकार-क्षेत्र में नहीं है, लेकिन 15 न्यायाधीशों ने सर्वसम्मति से जो फैसला सुनाया है, वह भारत की बड़ी जीत है और पाकिस्तान के चेहरे पर एक साथ 15 थप्पड़ों की मार है। अलबत्ता यह भारत की आखिरी जीत नहीं है। अभी एक पड़ाव पार किया गया है। अभी तो लंबी लड़ाई सामने है। बेशक पाकिस्तान में फौजी अदालतें निरस्त हो चुकी हैं, लेकिन अब भी क्या गारंटी है कि वहां की सामान्य अदालत से कुलभूषण को पूरा इनसाफ मिल सकेगा? पाकिस्तान में माहौल और वक्त पूरी तरह बदल चुके हैं। आज पाकिस्तान आर्थिक दिवालिएपन की कगार पर है। बड़े देश और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाएं पाकिस्तान को कर्ज देने को तैयार नहीं हैं। कई बार आग्रह करने पर अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड टं्रप से 22 जुलाई को मुलाकात का वक्त पाकिस्तान के वजीर-ए-आजम इमरान खान को मिला है, लिहाजा यह पाकिस्तान के लिए एक नाजुक मौका है। उसे साबित करना है कि वह सुधर रहा है। बेहतर छवि का बन रहा है। पाकिस्तान के सामने फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की काली सूची में दर्ज किए जाने का खतरा और खौफ है। बेहतर बनने की चाह में पाकिस्तान ने करतारपुर कॉरिडोर को लेकर भारत की अधिकतर मांगें मान ली हैं। भारत ने दोबारा बालाकोट न करने का कोई आश्वासन नहीं दिया, लेकिन पाकिस्तान ने अपना हवाई मार्ग खोल दिया है। मुंबई के 26/11 आतंकी हमले के ‘मास्टर माइंड’ हाफिज सईद को नए सिरे से गिरफ्तार कराया है। बेशक टं्रप ने इस गिरफ्तारी पर तंज कसा है। चूंकि अंतरराष्ट्रीय अदालत ने पाकिस्तान को वियना संधि के उल्लंघन का दोषी करार दिया है और कुलभूषण सरीखे करीब 40 अन्य मामले पाकिस्तान में अब भी लंबित पड़े हैं, लिहाजा अब यह भी दरकार की जा रही है कि पाकिस्तान हुकूमत अंततः कुलभूषण की रिहाई का ऐलान न कर दे। कुलभूषण बीते तीन सालों से पाकिस्तान की जेल में कैद हैं। इस दौरान जिस तरह उनकी मां और पत्नी से मुलाकात कराई गई, बीच में शीशे की दीवार खड़ी की गई, तो वह बेहद अपमानजनक स्थिति थी। कुलभूषण को देखकर ऐसा लगा मानो उन्हें यातनाएं दी गई हों। बहरहाल जिस तरह कुलभूषण को गिरफ्तार किया गया और सैन्य ट्रिब्यूनल ने बंद कमरे में फांसी की सजा सुनाई, अब वह अतीत की कहानी हो गई है। नए संदर्भों में नए व्यवहार और नए नतीजों की अपेक्षाएं हैं। प्रधानमंत्री मोदी भी इस निर्णय को ‘सत्य और न्याय की जीत’ आंक रहे हैं, लेकिन पूरी जीत तब होगी, जब कुलभूषण अपने देश भारत लौट आएंगे।

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