रेस्क्यू आपरेशन पूरा, वापस भेजी एनडीआरएफ

कुमारहट्टी—चौबीस घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद कुमारहट्टी में मलबे में फंसे सभी 42 लोगों को निकाल लिया गया है। हालांकि इसमें से 13 जवानों सहित एक महिला की मौत हो गई है, लेकिन इतने बड़े हादसे में 28 लोगों को सकुशल निकाला जाना एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। रेस्क्यू आपरेशन पूरा होने के बाद मौके से एनडीआरएफ की कुछ टुकडि़यों को वापस भेज दिया गया है। खबर लिखे जाने तक मौके पर पुलिस बल व लोक निर्माण विभाग के कर्मचारी अभी भी मौजूद थे और मलबे को हटाने का कार्य कर रहे हैं। इस पूरे ऑपरेशन को एनडीआरएफ की टीमों ने बेहतर तरीके से अंजाम दिया।  इस आपरेशन में सेना,  पुलिस और होमगार्ड का भी पूरा साथ और समन्वय रहा है।  बता दें कि रविवार सायं करीब साढ़े तीन बजे के समीप कुमारहट्टी-नाहन मार्ग पर रुंदनघोरों गांव में चार मंजिला इमारत ढह गई थी, जिसमें 42 लोग मलबे की चपेट में आ गए थे। इसमे 30 असम राइफल के जवान सहित 12 सिविलियन लोग थे।  इमारत गिरने की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमला व सेना के जवानों ने मोर्चा संभाल लिया था। हालांकि इससे पहले स्थानीय लोगों ने मौके पर पहुंच लोगों को निकालना शुरू कर दिया था। थोड़ी ही देर बाद सेना से मामला जुड़ा होने के चलते तीन सेना की टुकडि़यां मौके पर पहुंच गई। इसके बाद एनडीआरएफ की टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर बचाव कार्य शुरू कर दिया था, जोकि सोमवार सायं साढ़े तीन बजे तक जारी रहा। जानकारी के अनुसार यह चार मंजिला इमारत करीब दस वर्षों पहले बेसमेंट पर बने एक मंजिल के साथ खरीदी थी। इसके पश्चात यहां पर रहते रहते इस भूमि पर चार मंजिला इमारत खड़ी कर दी। वहीं मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी घटना स्थल का जायजा लेने के लिए सोमवार सुबह आठ बजे पहुंच गए थे। घटनास्थल का जायजा लेने के पश्चात वह घालयों का कुशलक्षेम जानने के लिए पहले एमएमयू अस्पताल सुल्तानपुर और इसके बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र धर्मपुर गए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए है और इसकी रिपोर्ट 15 दिन के भीतर सौंपने को कहा है। वहीं उपायुक्त सोलन केसी चमन ने बताया कि धारा 304-ए व 336 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।

विभिन्न संस्थाओं ने की मदद

घायलों को निकालने में स्थानीय लोगों, गैर-सरकारी संस्थाओं और सामाजिक संस्थाओं का भी भरपूर सहयोग मिला। इस दौरान घायलों का महर्षि मार्कंडेश्वर मेडिकल कालेज अस्पताल,  सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र धर्मपुर और कमान अस्पताल चंडीगढ़ में इलाज चल रहा है। जिला प्रशासन राज्य सरकार के निर्देशानुसार घायलों के स्वास्थ्य लाभ पर निरंतर निगरानी रखे हुए है। 

प्रशासन ने दी फौरी राहत

जिला प्रशासन द्वारा मृतक के परिजन को  20-20 हजार रुपए  की फौरी राहत वितरित की गई है। इसके अलावा घायलों की गंभीरता को 10-10 हजार और 5-5 हजार रुपए की तुरंत सहायता राशि जारी कर दी गई है। उन्होंने बताया कि इसके अलावा मृतकों के परिजनों को राज्य सरकार के नियमानुसार 4-4 लाख रुपए की राशि भी प्रदान की जाएगी।

पहले था यहां डंपिंग प्वाइंट

स्थानीय लोगों ने बताया कि काफी वर्षों पहले यहां पर डंपिंग प्वाइंट हुआ करता था। आसपास के लोग मलबा व पत्थर आदि यहां गिराया करते थे लेकिन फिर यहां पर भवन बनना शुरू हो गए।

आसपास के घर भी किए खाली

खतरे को देखते हुए यहां पर साथ लगते घरों को खाली कर लिया गया है। बताया जा रहा है कि साथ लगते घर में मजदूर रहते है। जिन्होंने यहां से भवन को खाली कर दूसरी जगह शिफ्ट हो गए है और साथ ही इस जगह पर किसी को न जाने बारे कहा गया है।

इमारत का ग्राउंड फ्लोर था पिल्लर पर

रविवार सायं जमीदोंज हुई इमारत में चार बिल्डिंग थी। बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर पर केवल पिल्लर लगा निर्माण कार्य छोड़ा हुआ था। इमारत के दूसरे फ्लोर में कमरे जबकि तीसरे फ्लोर में जो  कि सड़क के साथ था उसमें सहज तंदूरी ढाबा था और चौथे फ्लोर पर स्वयं और कर्मचारी रहते थे।

सेना का हेलिकाप्टर भी लेता रहा जायजा

बिल्डिंग में अधिकतर सेना के जवान फंसे होने के चलते सेना का हेलिकाप्टर भी मौके का जायजा लेता रहा। रविवार शाम भी छत को उठाने के लिए भी हेलिकाप्टर को बुलाया गया था लेकिन अधिक धुंध होने के चलते घटनास्थल पर नहीं पहुंच सका। इसके पश्चात सोमवार सुबह करीब ग्यारह बजे भी सेना के हेलिकाप्टर ने राहत-बचाव कार्य का जायजा लिया।

डीसी, एसएसपी बारिश में रहे तैनात

रविवार से रुक-रुक कर हो रही बारिश भी राहत-बचाव कार्य में बाधा बनती रही लेकिन एनडीआरएफ, सेना के जवान व जिला प्रशासनिक अमला बारिश में भी तैनात रहा। सोमवार को भी सुबह बारिश होने से उपायुक्त सोलन केसी चमन सहित एसएसपी सोलन मधुसूदन सहित अन्य अधिकारी बिना छतरी के बारिश में भीगते दिखाई दिए और रेस्क्यू आपरेशन का पल-पल का फीडबैक लेते रहे।

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