लटक गई जयराम सरकार की खेल नीति

पिछले साल तैयार किया था ड्राफ्ट, अगली कैबिनेट में जाएगा मामला

शिमला-प्रदेश की नई खेल नीति लटकती नजर आ रही है। हालांकि पिछले साल सरकार ने खेल नीति 2001 में संशोधन के लिए ड्राफ्ट भी तैयार कर दिया था, लेकिन अभी तक लागू नहीं हुई। सूत्रों के मुताबिक नई खेल नीति को मंजूरी के लिए एजेंडा अगली कैबिनेट मीटिंग में जाएगा। कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही नई खेल नीति लागू की जाएगी। उल्लेखनीय है कि अभी हिमाचल प्रदेश में 2001 की खेल नीति चल रही ह, जिसमें सरकार ने व्यापक संशोधन किया है। इसके लिए सरकार और राज्य खेल विभाग ने हरियाणा राज्य की खेल नीति को भी स्टडी कर दी। ऐसे में जल्द ही हिमाचल प्रदेश स्पोर्ट्स पॉलिसी-2019 लागू होगी। प्रदेश सरकार ने पिछले साल ही ऐलान कर दिया था कि अब न तो खेल विधेयक लाएगी और न ही अध्यादेश। बताया गया कि संशोधित खेल नीति में प्रदेश में जितने भी खेल संघ हैं, उन्हें लोकतांत्रिक तरीके से काम करने का पूरा अधिकार मिलेगा। एसोसिएशन में नियुक्तियों को लेकर भी सरकार कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी। खेल को राजनीति से दूर करने के लिए ही जयराम सरकार भविष्य में कोई भी खेल विधेयक नहीं लाएगी। इसके बदले 2001 की खेल नीति में व्यापक संशोधन के लिए ड्राफ्ट भी तैयार कर दिया है। गौरतलब है कि पूर्व की वीरभद्र सिंह सरकार ने हिमाचल प्रदेश क्रिकेट अकादमी के बहाने 19 खेल संघों पर कंट्रोल करने के लिए ही बिल पेश किया था, जिसे प्रदेश की वर्तमान सरकार ने वापस लिया है। 

नेताओं के परिजनों को योग्यता पर जगह

खेल मंत्री गोविंद ठाकुर ने कहा है कि खेल संघों में नेताओं के परिवारों को योग्यता के मुताबिक ही स्थान मिलना चाहिए। हर स्पोर्ट्स एसोसिएशन में खिलाडि़यों को ही पदाधिकारी बनने का मौका मिलना चाहिए। इसके लिए नई खेल नीति में पूरा प्रावधान किया जाएगा।

खिलाडि़यों पर बरसेंगे इनाम

प्रदेश सरकार द्वारा तैयार की गई नई खेल नीति में राज्य स्तरी, राष्ट्रीय, ओलंपिक सहित अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम कमाने वाले खिलाडि़यों को बेहतर लाभ मिलेगा। हालांकि प्रदेश में स्पोर्ट्स कोटे से सरकारी नौकरी के लिए तीन प्रतिशत का प्रावधान हैं, जिसे सरकार बढ़ा भी सकती है।

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