लीना से सीखें जीरो बजट खेती

करसोग —शून्य लागत खेती को पूरी तरह अमली तौर पर करके दिखाने वाली उच्च शिक्षित ग्रामीण महिला लीना शर्मा जहां करसोग का नाम रोशन कर रही हैं वही क्षेत्र के सभी किसानों के लिए भी एक मिसाल बनकर बेमिसाल कार्य कर रही हैं। लगभग जीरो बजट खेती वाली तकनीक सर्वप्रथम अपने खेतों में हकीकत करके दिखाने वाली लीना शर्मा आज शायद किसी परिचय की मोहताज नहीं रहीं हैं। बावजूद इसके लीना शर्मा अन्य किसानों को भी निशुल्क जानकारी प्रदान करने के लिए निरंतर जुटी हुई है ताकि सभी किसान पुरानी पांरम्पारीक खेती की ओर चलते हुए अपनी सोना उगलने वाली जमीनों की उत्पादन शक्ति कायम रख सकें। जमीन की प्राकृतिक उपजाऊ क्षमता को रसायनिक खादों और कीटनाशकों से बचाने के लिए समाज की मानसिकता को बदलने की महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली लीना शर्मा को करसोग के विधायक हीरा लाल ने ठांगर सपनोट में कृषि विभाग द्वारा आयोजित शून्य लागत खेती पर आयोजित शिविर मे शाल भेंटकर सम्मानित किया। इस अवसर पर कृषि विभाग के एस एम एस राम किशन, बी टी एम चेतराम, ए टी एम सोनाली गुप्ता, लेखराज सोहन लाल लोक निर्माण विभाग, सिंचाई एवं जन-स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, कर्मचारी, विभिन्न महिला मंडल के सदस्य पंचायत सदस्य और किसान बागबान उपस्थित थे। इस अवसर पर विधायक हीरा लाल ने कहा कि जल-जंगल और जमीन की रक्षा राष्ट्रीय जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। फसलों में रासायनिक खादों का प्रयोग, विषैले रासायनिक पदार्थों की स्प्रे स्पष्ट रुप से प्राकृति से छेड़छाड़ का नतीजा है कि आज ये विषैले पदार्थ अन्न और सब्जियों के माध्यम से प्राणी मात्र के शरीर में जाकर अनेक असाध्य रोगों को जन्म दे रहे हैं। वास्तव में विष मुक्त खेती ही हमारी पारंपरिक मौलिक खेती है जिससे हम दूर होते जा रहे हैं। अतः शून्य लागत खेती को अपनाने की आज बहुत आवश्यकता है। इसके लिए उन्होंने सरकार, विभाग और स्वयं सेवियों की प्रशंसा की। यहां उल्लेखनीय है कि उपमंडल करसोग के ऐतिहासिक गांव पांगणा में पंजायनू गांव स्थित किसान परिवार में शहरी चकाचौंध को छोड़कर पहुंचने बाद अब किसान जागरूक उद्यमी महिला लीना शर्मा में सबसे पहले सुभाष पालेकर खेती का प्रशिक्षण शिमला में प्राप्त किया तथा उसके बाद उसी जीरो बजट खेती को पंजयानू में अपने खेतों में मूर्त रूप देने के लिए कड़ी मेहनत की। रसायनिक खादों का उपयोग त्याग किया व अपने द्वारा तैयार की गई घरेलू स्तर पर खादों को खेतों में डालकर हेरानी जनक फसल का उत्पादन किया, किसी कीटनाशक का प्रयोग नहीं किया। जब इसमें कामयाबी हासिल हुई तो क्षेत्र के सभी किसान अब उनसे जानकारी हासिल करते हुए अपने खेतों में भी उसी प्रकार की खेती कर रहे हैं। उच्च षिक्षित अब किसान का रूप लेने वाली महिला लीना शर्मा उन किसानों के लिए भी एक मिसाल बनी है जो खेती से मुंह मोड़ रहे थे या फिर रसायनिक खादों से भूमि को तबाह कर रहे थे वह जागरूक होते हुए किसान महिला लीना शर्मा के साथ चलते हुए उत्साहित भी कर रहे हैं। लीना शर्मा के प्रयासों को प्रदेश कृषि निदेशक जहां उनके गांव पहुंचकर सलाम कर चुके हैं वहीं कृषि विभाग द्वारा भी उनके कोशिशों को सफल बताया गया है।

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