शिमला…महंगे पानी पर कामरेड लाल

शिमला—सीपीआईएम की जिला कमेटी ने प्रदेश सरकार व नगर निगम शिमला के द्वारा पानी के बिलों में की गई भारी वृद्धि की निंदा की है। सीपीआईएम ने इस वृद्धि को तुरंत वापस लेने की मांग उठाई है। शिमला शहर में अप्रैल के महीने में पानी की दरों में वृद्धि की गई थी औैर अब सीवरेज चार्जेज के नाम पर न्यूनतम 100 रुपए प्रति माह कर दिया गया है, जो कि कई उपभोक्ताओं का 100 प्रतिशत बनता है। सीपीआईएम के जिला सचिव संजय चौहान ने कहा कि वर्ष 2015 तक सीवरेज चार्जेज कुल बिल का 50 प्रतिशत लिया जाता था, जो पूर्व नगर निगम ने प्रदेश सरकार से लंबे संघर्ष के पश्चात इसे 30 प्रतिशत किया था। तब से लेकर अभी तक केवल 30 प्रतिशत ही सीवरेज चार्जेज लिए जा रहे थे। मगर इस माह जारी किए गए बिलों में यह न्यूनतम 100 रुपए प्रति माह की दर से जोड़ दिए गए हैं, जिससे कम पानी इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं के लिए यह 100 प्रतिशत हो गया है, जो कि बिल्कुल भी न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि जब से भाजपा की सरकार व नगर निगम शिमला का गठन हुआ है। शिमला शहर की जनता पर पानी, बिजली, कूडा की सेवाओं की दरों में भारी वृद्धि की गई है, जिससे जनता पर भारी आर्थिक बोझ पड़ा है। शिमला शहर में पीने का पानी निजी हाथों में देने के लिए नगर निगम के जल विभाग को इससे अलग कर वर्ष 2018 में सरकार व नगर निगम ने एक कंपनी का गठन किया गया है। अब कंपनी पर न तो नगर निगम का कोई नियंत्रण है और न ही इसमें कोई नीतिगत हस्तक्षेप हो सकता है। कंपनी अब अपने स्तर पर निर्णय ले कर पेयजल को एक सेवा के रूप में नहीं बल्कि एक वस्तु के रूप में देने का कार्य कर रही है। पेयजल की कंपनी के गठन के कारण आज जनता को बेहद परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई वार्डों में तो मार्च 2018 के पश्चात से करीब 1 वर्ष 6 माह बीतने के पश्चात भी अभी तक बिल नहीं दिए गए हैं। अधिकांश वार्डों में कहीं 4 माह तो कहीं 6 माह के बाद किसी भी आधार पर बिल दिए जा रहे हैं, जबकि मार्च 2017 में तत्कालीन नगर निगम ने निर्णय लिया था कि मई 2017 से हर माह मीटर रीडिंग के आधार पर बिल दिए जाएंगे और यह सारी व्यवस्था ऑनलाइन कर दी जाएगी। मगर वर्तमान नगर निगम यह निर्णय तो नहीं लागू कर पाई इसके विपरीत कंपनी का गठन कर आज शहरवासियों को परेशानी में धकेल दिया है। उन्होंने मांग उठाई है कि पेयजल की दरों व सीवरेज चार्जेज में की गई वृद्धि को तुरंत वापस लें। हर उपभोक्ता को मीटर रीडिंग के आधार पर हर माह बिल दिए जाएं तथा सभी सेवाओं को ऑनलाइन किया जाए। सरकार शिमला शहर की पेयजल व्यवस्था के निजीकरण की व्यवस्था को बदल कर इसे पुनः नगर निगम शिमला के अधीन करें ताकि संविधान के 74वें संशोधन जिसमें शहरों में पेयजल की व्यवस्था करने का दायित्व नगर निगम को दिया गया है, को लागू किया जा सके। यदि सरकार इन मांगों को शीघ्र पूरा नहीं करती है तो पार्टी जनता को लामबंद कर सरकार व नगर निगम की इन जनविरोधी नीतियों के विरुद्ध आंदोलन करेगी।

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