शिव की नगरी श्रीखंड को लग रहा गंदगी का ग्रहण

कुल्लू —मेरी धर्म में पूर्ण आस्था है पर धर्म के नाम पर पर्यावरण के साथ अन्याय  बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। सुंदर घाटी होने के बाद साथ महादेव की नगरी अगर गंदी हो जाए तो उसे देखने के बाद मन झकझोर जाता है। यह कहना है पर्वतारोहण डाक्टर ललित मोहन का। गुरुवार को एक बाद फिर डाक्टर ललित मोहन ने श्रीखंड में फैली गंदगी को लेकर जिला प्रशासन व सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने  पिछले  लेख  में श्रीखंड महादेव यात्रा के दौरान नशे के काले कारोबार के बारे में जिला प्रशासन कुल्लू व सरकार को अवगत करवाया है।  वहीं, एक बार फिर में सरकार व जिला प्रशासन कुल्लू का ध्यान स्वच्छ भारत मिशन की ओर ले जाना चाहते हैं। प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत मिशन को सफल बनाने के लिए हर जिला में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। कई जगहों पर गांव में साफ-सफाई जारी है, लेकिन फिर ऐसे में महादेव की नगरी श्रीखंड की अनदेखी क्यों की जा रही है। यहां प्रशासन साफ-सफाई को लेकर क्यों जागरूक नहीं है, जहां पर महादेव के दर्शन के लिए हजारों सैलानी बाहरी राज्यों से भी आ रहे हैं, जो यहां फैली गंदगी को देखने के बाद किस तरह की छवि अपने मन में लेकर लोटेंगे। डाक्टर ललित मोहन कहते हंै कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत ऐसा प्रतीत होता है कि अधिकारी केवल मात्र फाइलों में ही साफ-सफाई का ज्यादा ध्यान रखते हंै। इस बात को पता इन दिनों श्रीखंड यात्रा में फैली गंदगी से लगाया जा सकता है, जहां पर यात्रा शुरू होने के कुछ देर बाद ही जगह-जगह पर प्लास्टिक की बोतलों सहित अन्य खाने के रैपर आम मिलेंगे। आलम यह है कि गंदगी को एक जगह पर फेंका जाए, इसके लिए कहीं पर भी प्रशासन की और से पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हंै। डाक्टर ललित मोहन ने बुधवार को ही श्रीखंड यात्रा से लौटे हैं। ऐसे में जो भी कमी उन्होंने मौके पर देखी है, उसे वह सोशल मीडिया में भी सभी के साथ साझा कर रहे हैं, ताकि प्रशासन व सरकार जागरूक हो सके। डाक्टर ललित मोहन ने बताया कि श्रीखंड  महादेव यात्रा के दौरान प्रकृति के साथ हो रहे अन्याय को वह बयां नहीं कर पा रहा। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन हजारों लोग यहां पहुंच रहे हैं। इसके साथ यहां पर्यावरण के साथ भी छेड़छाड़ हो रही है। उन्होंने कहा कि यहां जाओं गांव से लेकर पार्वती बाग तक करीब पांच सौ से अधिक  टैंट लगे हैं। वहीं, यहां गारवेज को एक जगह एकत्रित करने की कोई व्यवस्था नहीं है।

क्या कहते हैं अधिकारी

आनी के एसडीएम चेत सिंह का कहना है कि गारबेज को एकत्रित करने के लिए एक एनजीओ के साथ बात की गई है। एनजीओ अंत में सारा कूड़ा मौके पर जाकर एकत्रित करते है और उसे साथ शिमला ले जाते है। इसी के साथ सभी निजी टैंट वालों को शौचालय बनाने के साथ-साथ टैट में गारबेज की व्यवस्था रखने की बात कही है। मौके पर प्रशासन की टीम भी मौजूद है। अगर कोई अपने काम में कोताही बरतता है तो उसे वख्शा नहीं जाएगा।

फूलों की यहां करीब 60 प्रजातियां

डा. ललित मोहन, पर्वातारोही हिमाचल प्रदेश का कहना है कि श्रीखंड को जाने वाले मार्ग में प्रकृति के साथ छेड़छाड़ की जा रही है। टैंट लगाने के लिए जमीन को समतल करने के लिए खुदाई की गई है, जिस कारण से यहां फूलों की विभिन्न प्रजातियां भी विलुप्त हो रही हैं। अगर इन फूलों की सुंदर प्रजातियों को बचाना है तो वन विभाग को ही आगे आकर इसे बचाने में पहल करनी होगी। अन्यथा धीरे-धीरे यहां फूलों की जो करीब 60 प्रजातियां हैं, वे हमेशा के लिए खत्म हो जाएंगी। डाक्टर ललित मोहन कहते हैं कि कई हरे-भरे पेड़ों की बलि चढ़ रही है, जिस ओर भी प्रशासन को ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि श्रीखंड को जाने वाला मार्ग बेहद सुंदर है। ऐसे में सरकार व प्रशासन को चाहिए कि यहां गारबेज को लेकर पुख्ता इंतजाम किए जाएं।

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