सरकारी दुकानों में 4जी का जंजाल बना बायो मीट्रिक सिस्टम

नेरवा—सरकारी राशन डिपुओं में सरकार ने राशन वितरण प्रणाली को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से सरकार  ने बायो मीट्रिक सिस्टम तो लगा दिए परंतु इससे आने वाली खामियों को नजरअंदाज कर दिया गया। आज यही खामियां उपभोक्ताओं के साथ-साथ डिपो होल्डरों के लिए भी मुसीबत बन कर सामने आ रही है। ग्रामीण क्षेत्र जहां किसान बागबान अधिक संख्या में हैं वहां पर यह समस्या ज्यादातर देखने में आ रही है। लिहाजा ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार द्वारा चालु किया गया यह सिस्टम एक बड़ी समस्या बन गया है। समस्या को देखते हुए उपभोक्ताओं ने इस प्रणाली में बदलाव कर कोई अन्य ऐसा वैकल्पिक व कारगर सिस्टम शुरू करने की मांग उठाई है जिससे लोगों को सरकारी राशन लेने में दिक्कतें न उठानी पड़े। उपभोक्ताओं का कहना है कि कभी इंटरनेट की समस्या तो कभी अंगूठे और अंगुलियों के निशान का मिलान न होने से न केवल उन्हें बल्कि सरकारी डिपो में काम करने वाले कर्मचारियों को भी मुश्किलें उठानी पड़ती है। इस समस्या के चलते राशन की दुकानों में हर समय भीड़ लगी रहती है एवं कई बार तो दूर दराज से आऐ लोगों को बिना राशन खाली हाथ घर लौटना पड़ता है। नेरवा की सरकारी राशन की दुकानों में बायो मीट्रिक मशीनों को बीएसएनएल का थ्री जी नेटवर्क सिस्टम से कनेक्ट किया गया है। कई बार इसका नेटवर्क काम नहीं करता तो कई बार इसकी स्पीड इतनी कम हो जाती है कि एक उपभोक्ता को निपटाने में ही एक एक घंटे का समय लग जाता है। नेटवर्क की इस समस्या के चलते दूकान में भीड़ लगी रहती है व कर्मचारियों को भी लोगों को राशन वितरित करने में परेशानी से दो चार होना पड़ता है। दूसरी सबसे बड़ी समस्या बायो मीट्रिक मशीन में अंगूठे या अंगुलियों के प्रिंट का मिलान न होना है। जमीन में काम करने वाले अधिकांश लोगों को इस समस्या का सामना भी करना पड़ता है। नेरवा के शिहकयार स्थित सरकारी दुकान से राशन लेने आए लोगों हरी सिंह ठाकुर, राम दत्त शर्मा, मोहम्मद सफी व श्याम सिंह रंटा आदि ने दिव्य हिमाचल को बताया कि अधिकांश उपभोक्ता किसान हैं व दिन रात खेतों में काम करते हैं। जिस वजह से या तो अंगुलियों में मिट्टी के कण रह जाते है या फिर खेतों में अधिक काम करने वाले किसानों के अंगूठे और अंगुलियों के प्रिंट घिस कर बदल जाते हैं, जिस वजह से मशीन में इन लोगों की अंगुलियों के प्रिंट का मिलान नहीं हो पाता व डिपो धारक राशन देने से मना कर देता है। लोगों ने सरकार से मांग की है कि इस सिस्टम को बदल कर कोई कारगर और वैकल्पिक व्यवस्था की जाए, ताकि उपभोक्ताओं को आऐ दिन होने वाली इस परेशानी से निजात मिल सके।

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