सेवानिवृत्त न्यायाधीश भी बन सकेंगे अध्यक्ष

मानवाधिकार आयोग के लिए प्रावधान, लोकसभा में संशोधन विधेयक पारित

नई दिल्ली – मानवाधिकार संरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2019 शुक्रवार को लोकसभा में पारित हो गया। इससे राष्ट्रीय तथा राज्य मानवाधिकार आयोगों में खाली पदों को भरने में मदद मिलेगी। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि मोदी सरकार इस ध्येय से काम कर रही है कि किसी भी व्यक्ति पर अत्याचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और न ही किसी अत्याचारी को बख्शा जाएगा। उन्होंने कहा कि मानवाधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने और उन्हें सदृढ़ बनाने के उद्देश्य से यह विधेयक लाया गया है। विधेयक में प्रावधान है कि उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश भी राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष बन सकेंगे। अभी सिर्फ उच्चतम न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश ही इस पद के पात्र हैं। इसी प्रकार विधेयक में राज्य मानवाधिकार आयोगों के अध्यक्ष पद के लिए उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को भी पात्र बनाने की व्यवस्था है। श्री राय ने कहा कि 25 में से 13 राज्यों के मानवाधिकार आयोग में अध्यक्ष के पद खाली हैं। कई राज्यों में आयोग में पूरे सदस्य नहीं हैं। आयोगों के अध्यक्षों के पद खाली रहने से मामलों की सुनवाई तथा प्रक्रिया में देरी हो रही है। इस विधेयक के कानून बन जाने के बाद ये पद भरे जा सकेंगे तथा लंबित मामलों में कमी आएगी। श्री राय ने बताया कि सिविल सोसायटी का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए आयोग में उनके प्रतिनिधियों की संख्या दो से बढ़ाकर तीन की गई है, जिसमें कम से कम एक महिला होगी। पहले की तरह राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष और अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य बने रहेंगे। विधेयक में प्रावधान है कि राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष तथा दिव्यांगजनों संबंधी मुख्य आयुक्त को मानवाधिकार आयोग में शामिल किया जाएगा। इसमें राष्ट्रीय तथा राज्य मानवाधिकार आयोगों के अध्यक्षों तथा सदस्यों के कार्यकाल पांच साल से घटाकर तीन साल करने का भी प्रावधान है। केंद्र शासित प्रदेशों के लोगों को अब तक शिकायत करने के लिए दिल्ली आना पड़ता था।

संशोधन विधेयक को वापस ले सरकार

नई दिल्ली – कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी दलों ने मानवाधिकार संशोधन विधेयक 2019 को अधूरा करार देते हुए कहा है कि इसमें बहुत खामियां हैं और यह आयोग के अधिकारों को पूरी तरह से संरक्षित नहीं करता है इसलिए विधेयक को वापस लिया जाना चाहिए। कांग्रेस के शशि थरूर ने गुरुवार को लोकसभा में विधेयक पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि मानवाधिकार आयोग हमारे मूल अधिकारों की रक्षा के लिए है। मानव अधिकारों का सरंक्षण सरकार की जिम्मेदारी है और इसे पेरिस सिद्धांत के अनुसार बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आयोग की स्वायत्तता को गंभरीता से लिया जाना चाहिए और इसमें नियुक्ति को पारदर्शी तथा निर्धारित समय पर किए जाने की व्यवस्था करना आवश्यक है।

सांसदों के प्रदर्शन से नाराज स्पीकर बोले, मेरे स्टाफ को हाथ मत लगाना

नई दिल्ली – लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला शुक्रवार को सदन में प्रदर्शन कर सांसदों पर नाराज हो गए। उन्होंने सांसदों को चेतावनी दी कि वे सदन के किसी भी कर्मचारी को हाथ भी न लगाएं। दरअसल, ओम बिड़ला ने कर्नाटक में जारी सियासी हालात पर चर्चा से मना कर दिया था। इसके बाद भी कांग्रेस, तृणमूल और डीएमके सांसद प्रश्नकाल के दौरान वेल में प्रदर्शन कर रहे थे, इससे नाराज होकर स्पीकर ने कहा कि मेरे स्टाफ को हाथ मत लगाना।

एक साल में जितना अनाज ब्रिटेन खाता है, उतना भारत में सड़ जाता है

नई दिल्ली – ब्रिटेन के नागरिक एक साल में जितने अनाज का उपभोग करते हैं, उतना अनाज भारत के भंडारणों में खराब हो जाता है। ब्रिटेन एक साल में जितने अनाज का उपभोग करता है, उतना अनाज भारत में भंडारण के अभाव में नष्ट हो जाता है। यह जानकारी भारतीय जनता पार्टी के विजय पाल सिंह तोमर ने शुक्रवार को राज्यसभा में अपना निजी संकल्प पेश करते हुए दी। उन्होंने कृषि उत्पाद को घटाने ले लिए अधिकतम वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) पांच प्रतिशत करने और संवैधानिक संस्था के रूप में राष्ट्रीय किसान आयोग गठित करने की भी सरकार से मांग की। श्री तोमर ने कहा कि इस समय देश में कृषि विकास दर 2.9 प्रतिशत है और अर्थव्यस्था में उसका 14.4 प्रतिशत योगदान है, लेकिन देश में दो करोड़ टन अनाज भंडारण के अभाव में नष्ट हो जाता है।

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