हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजे शिवालय

सोलन—पवित्र सावन भगवान शंकर का महीना माना जाता है। श्रावण मास में पूजा-अर्चना से शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं। प्रथम सोमवार को लेकर क्षेत्र के शिवालयों में पूजा-अर्चना की विशेष तैयारी की गई। पवित्र श्रावण मास के पहले सोमवार को लेकर प्राचीन शिवमंदिर जटोली, शिव गुफा, मुरारी मार्केट शिव मंदिर में श्रद्धालु भोले बाबा के रंगों में रंगें नजर आए। श्रद्धालुओं ने भोले बाबा को बिल्वपत्र, भांग, धतूर, दूध व गंगाजल आदि चढ़ाए। सोमवार की सुबह से ही सोलन शहर के भक्त मंदिरों की ओर उमडे़ नजर आए। सोलन शहर से लेकर आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में अवस्थित शिवालयों पर सावन माह के पहले सोमवार पर काफी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। शिवालयों पर जलाभिषेक के साथ हर-हर महादेव की जयकारे से गूंजायमान हुआ। पूरा वातावरण भक्तिमय रहा। सोमवार को मंदिरों को विशेष रूप से सजाया-सवांरा गया। सोलन के ज्योतिष सुभाष शर्मा ने बताया कि सावन में शिव की पूजा करने के कई विधान हैं। सोलह सोमवार से लेकर पूरे मास उपवास तक। लोग तरह-तरह से शिव की आराधना करते हैं। अगर आपके पास ये सब नियम, व्रत, उपवास का समय ना भी हो तो शिव महापुराण कहता है कि अपनी दिनचर्या में दो-तीन चीजें शामिल कर लें। पूरे सावन के महीने में उसका पालन करें।

मंगला गौरी का भी रखा जाता है व्रत

भगवान शिव को प्रिय सावन महीना 17 जुलाई को शुरू हुआ व 15 अगस्त को सावन का आखिरी दिन है। इस दौरान भोले बाबा की उपासना करने पर भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती हैं। बहुत से लोग सावन के पहले सोमवार से ही 16 सोमवार व्रत की शुरुआत करते हैं। सावन की एक बात और खास है कि इस महीने में मंगलवार का व्रत भगवान शिव की पत्नी देवी पार्वती के लिए किया जाता है। श्रावण के महीने में किए जाने वाले मंगलवार व्रत को मंगला गौरी व्रत कहा जाता है।

इस तरह करें पूजा

सोमवार को सुबह स्नान करके एक तांबे के लोटे में अक्षत, दूध, पुष्प, बिलपत्र आदि डालें। इसके बाद शिव मंदिर जाएं और वहां शिवलिंग का अभिषेक करें। इस दौरान ‘ऊं नमो शिवाय’ मंत्र का जाप करें। संभव हो, तो मंदिर परिसर में ही शिव चालीसा और  रुद्राष्टक का पाठ करें ।

प्रत्येक सोमवार पूजा का समय

प्रातः 5ः40 से 7ः20, 9ः20 से 10ः45 बजे अमृत एवं शुभ के चौघडि़या मुहूर्त में। अपराह्न 3ः45 से सांय 7ः15 तक लाभ, अमृत के चौघडि़या में।

शीतलता का प्रतीक सावन

सावन का महीना शीतलता का प्रतीक है। रिमझिम बारिश की फुहारों से प्रकृति हरी-भरी हो जाती है। इस महीने में भगवान शंकर की पूजा-अर्चना का भी विशेष महत्व है। भगवान शंकर ने विषपान किया था इसलिए शीतलता उन्हें भाती है। सावन में श्रद्धालु जलाभिषेक करते हैं, जिससे भगवान शंकर खुश होते हैं। श्रद्धालु बिल्वपत्र, गंगाजल, दूध, दही, मधु के साथ जलाभिषेक करते हैं।

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