11वीं पास, पर फिर 11वीं में ही मिली एडमिशन

 शिक्षा विभाग की नीतियों ने बर्बाद कर दिया कुल्लू की छात्रा का साल, एसओएस से मिले गोल्डन चांस में 10वीं पास करने के बाद भी जमा दो में दाखिला नहीं

मंडी —सरकारी स्कूलों में गिरते शिक्षा के स्तर उठाने के लिए सरकारें खोखले दावे करती आई हैं। हालांकि खराब रिजल्ट पर शिक्षकों की इन्क्रीमेंट रोकने की बात की जाती है, लेकिन शिक्षा विभाग अपनी खामी देखने को तैयार नहीं है। इस खामी के चलते 11वीं पास करने के बाद भी छात्रा को 12वीं में दाखिला ही नहीं मिला। दाखिले के आखिरी दिन जब मां बच्ची के एडमिशन के लिए स्कूल पहुंची तो पहले उसने बच्ची को पढ़ाने से मना कर दिया, लेकिन बच्ची के भविष्य को देखते हुए उसे फिर से 11वीं में दाखिला दिलवा दिया। मामला कुल्लू जिला के आनी के तहत पड़ने वाले कुटवा स्कूल का है। यहां पढ़ने वाली छात्रा अंजलि ने 2017 में दसवीं में दाखिला लिया और 2018 में दसवीं कक्षा के पेपर दिए। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड का रिजल्ट आया तो अंजलि दसवीं में एक पेपर में फेल हो गई। अंजलि को 11वीं में कुटवा स्कूल में ही प्रोविजनल दाखिला मिल गया। छात्रा की 11वीं की पढ़ाई चलती रही। छात्रा को कंपार्टमेंट पास करने के दो मौके मिले, लेकिन अंजलि दोनों ही मौकों में नाकाम रही। इस बीच छात्रा 11वीं में भी पास हो गई। इतने में शिक्षा विभाग ने एसओएस के जरिए दसवीं के छात्रों को कंपार्टमेंट पास करने का गोल्डन चांस दिया गया। अंजलि इसमें पास हो गई। इससे छात्रा ने दसवीं भी 2019 और जमा एक भी 2019 में ही पास की। अब जब दाखिले की बात आई तो छात्रा को जमा दो में दाखिला ही नहीं दिया गया, क्योंकि विभाग के नियम कहते हैं कि दसवीं और जमा एक पास करने के साल में कोई अंतर ही नहीं है। छात्रा के पिता दुनिया में नहीं हैं, मां जैसे-तैसे बच्चों को पढ़ा रही है। अंजलि आईआरडीपी की श्रेणी में आती है।a

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