20 साल में दूसरी बार अंतरराष्ट्रीय अदालत में भारत से हारा पाकिस्तान

पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव पर बुधवार को इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (आईसीजे) ने भारत के पक्ष में फैसला सुनाया। पाक की सैन्य अदालत ने जाधव को जबरन अपराध कबूल करवाकर मौत की सजा सुनाई थी, जिसे भारत ने चुनौती दी थी। बता दें कि 20 साल में यह दूसरा मौका है, जब इंटरनेशनल कोर्ट में पाकिस्तान भारत से हारा है। जानकारी के मुताबिक, दस अगस्त 1999 को वायुसेना ने गुजरात के कच्छ में पाकिस्तान नेवी के एयरक्राफ्ट एटलांटिक को मार गिराया था। इसमें सवार सभी 16 सैनिकों की मौत हो गई थी। पाकिस्तान का दावा था कि एयरक्राफ्ट को उसके एयरस्पेस में गिराया गया। उसने इस मामले में भारत से छह करोड़ डालर मुआवजा मांगा था। आईसीजे की 16 जजों की बैंच ने 21 जून, 2000 को 14-2 से पाकिस्तान के दावे को खारिज कर दिया था। इसके बाद यह दूसरा मौका है, जब पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय अदालत में हार हुई है और कोर्ट ने उससे जाधव की फांसी की सजा पर पुनर्विचार करने को कहा है।

पाक ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संधियों की उड़ाई धज्जियां

कुलभूषण केस में पाक की सैन्य अदालत ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संधियों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई हैं। वियना संधि का उल्लंघन करते हुए उन्हें न सिर्फ कानूनी मदद से दूर रखा, बल्कि मां और पत्नी तक से सीधे मिलने नहीं दिया गया। दो साल और दो महीने तक आईसीजे की 15 सदस्यीय पीठ में सुनवाई के दौरान भारत ने पाक का पूरा कच्चा चिट्ठा दुनिया के सामने रखा। नीदरलैंड्स के दि हेग के पीस पैलस में ‘प्रेजिडेंट ऑफ दि कोर्ट’ जस्टिस अब्दुलकावी अहमद यूसुफ ने बुधवार को भारत के पक्ष में फैसला सुनाया।

2016 में पाक ने किया था गिरफ्तार, भारत ने बताया था अपहरण

बता दें कि पाकिस्तान ने 3 मार्च 2016 को दावा किया था कि उसने एक रिटायर भारतीय नेवी ऑफिसर को बलूचिस्तान से गिरफ्तार किया है। भारत ने पाकिस्तान के दावे को खारिज करते हुए कहा था कि इस्लामाबाद ने रिटायर्ड नेवी आफिसर कुलभूषण जाधव का ईरान से अपहरण किया, जहां वह रिटायरमेंट के बाद कारोबार के सिलसिले में थे।

2 साल 2 महीने तक आईसीजे में चला केस

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में जाधव का मामला करीब 2 साल और 2 महीने तक चला। भारत 8 मई, 2017 को आईसीजे पहुंचा था और पाक पर वियना कन्वेंशन की शर्तों के घोर उल्लंघन का आरोप लगाया था। भारत ने आईसीजे में कहा कि पाक ने जाधव तक कंसुलर एक्सेस की नई दिल्ली की मांग को लगातार खारिज किया, जो वियना कन्वेंशन का उल्लंघन है।

इसलिए मोहरा बनाया निर्दोष जाधव

पाकिस्तान कुलभूषण जाधव का इस्तेमाल बलूचिस्तान प्रांत के असंतोष का दोष भारत पर मढ़ने के लिए कर रहा है। पाकिस्तान को ईरान से सटी सीमा पर कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उसने ईरान के खिलाफ जैश-अल-अदल जैसे छद्म आतंकी समूहों का इस्तेमाल किया है। ईरानी अधिकारियों ने ईरान-पाकिस्तान बॉर्डर पर आतंकी गतिविधियां प्रायोजित करने की बात कह चुके हैं। हाल ही में अमरीकी गृह मंत्रालय ने भी जैश-अल-अदल को विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी जुनदुल्लाह का प्रमुख संगठन घोषित किया है।

आईसीजे में भारत ने खोली हर झूठ की पोल

भारत ने आईसीजे में सुनवाई के दौरान पाकिस्तान की कारस्तानी को अच्छे से सामने रखा। अंतरराष्ट्रीय कोर्ट को बताया कि कैसे पाकिस्तान एक गैरजवाबदेह राज्य रहा है और उसकी सैन्य अदालतें अंतरराष्ट्रीय संधियों एवं प्रतिबद्धताओं को तोड़ती रही हैं। पाक कांसुलर रिलेशंस पर वियना संधि और नागरिक एवं राजनीतिक अधिकारों पर अंतरराष्ट्रीय अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं, इसके बावजूद वह ऐसी हरकतें कर रहा है। भारत ने बताया कि कैसे पाकिस्तान की सैन्य अदालतें अंतरराष्ट्रीय बिरादरी की आंखों में धूल झोंकने की कवायद मात्र है। पाक में सैन्य अदालतों की स्थापना 2015 के बाद की गई। इसका एकमात्र मकसद मुकदमों में सेना के दखल सुनिश्चित करना था। पाक की सैन्य अदालतों ने अप्रैल, 2017 के बाद से मृत्युदंड की कई सजाएं दीं। भारत ने अदालत को बताया कि कैसे पाकिस्तान ने जाधव को अगवा कर पहले जबरन बयान दिलवाया और फिर इसके आधार पर उन्हें फांसी की सजा सुना दी। उन्हें कानूनी सहायता तक मुहैया नहीं कराने दी गई, जो कि वियना संधि का सीधे-सीधे उल्लंघन है।

केस के प्रमुख तथ्यः

१भारत ने अपने नागरिक कुलभूषण सुधीर जाधव की गिरफ्तारी, हिरासत में रखे जाने और मुकदमा चलाने के मामले में पाकिस्तान द्वारा वियना कन्वेंशन ऑन कांसुलर रिलेशंस, 163 के घोर उल्लंघन को लेकर आठ मई, 2017 को आईसीजे में शिकायत की। भारत ने स्पष्ट कहा कि जाधव केस में वियना कन्वेंशन का आर्टिकल 36 लागू होता है, क्योंकि पाकिस्तान ने जाधव को अरेस्ट करने के बाद भारतीय कांसुलरआफिसरों को को इसकी जानकारी नहीं दी।

इतना ही नहीं, भारतीय कांसुलर आफिसरों को जाधव से मिलने भी नहीं दिया गया और न ही उनका केस लड़ने के लिए कानूनी सलाहकार की व्यवस्था करने की अनुमति दी गई। इस लिहाज से पाक ने वियना कन्वेंशन के आर्टिकल 36(1) (बी) का उल्लंघन किया है। जाधव को कथित तौर पर तीन मार्च, 2016 को गिरफ्तार किया गया, जबकि पाक के विदेश सचिव ने इस्लामाबाद स्थित भारत के उच्चायुक्त को इसकी जानकारी 22 दिन बाद 25 मार्च, 2016 को दी। वह सूचना देने में तीन हफ्ते की देरी का कोई उचित कारण नहीं बता सका।

पाक की हिमाकत ऐसी कि उसके अधिकारियों ने सार्वजनिक तौर पर कहा कि जाधव को कांसुलर एक्सेस पाने का अधिकार ही नहीं है। इससे स्पष्ट होता है कि पाक ने जाधव को यह नहीं बताया कि उन्हें भारतीय कांसुलर पोस्ट से बात करने का अधिकार है। यह वियना कन्वेंशन का खुलेआम उल्लंघन है।

पाकिस्तान ने सिर्फ कांसुलर एक्सेस से संबंधित तमाम नीतियों को ही धता नहीं बताया, बल्कि मानवाधिकार के सामान्य सिद्धांतों की भी थोड़ी भी परवाह नहीं की। नागरिक एवं राजनीतिक अधिकारों पर अंतरराष्ट्रीय अनुबंध (आईसीसीपीआर) में उचित प्रक्रिया का विस्तृत जिक्र है। इस उचित प्रक्रिया का एक प्रमुख अवयव है- आपराधिक आरोपों के खिलाफ प्रभावी दलील रखने का अधिकार। साथ ही, साफ-सुथरी एवं निष्पक्ष सुनवाई के लिए आरोपी को अपने पंसद का वकील रखने का अधिकार दिया गया है।

आईसीसीपीआर के आर्टिकल 14 के जरिए न्यूनतम मानदंड के संदर्भ में उचित प्रक्रिया सुनिश्चित करने को कहा गया है। इसका पालन करने के लिए ही आर्टिकल 36 के तहत कॉन्स्युलर एक्सेस दिए जाने का प्रावधान किया गया है, लेकिन पाकिस्तान ने इस प्रावधान से कन्नी काटने की भरसक कोशिश की। इसके लिए उसने यह कुतर्क पेश किया कि कुलभूषण का मामला पहली नजर में जासूसी का है।

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