40 से ज्यादा कालेजों में पीजी, पर हैं नहीं गुरु जी

Jul 18th, 2019 12:15 am

यूजी शिक्षकों के सहारे ही चल रही मास्टर्ज की पढ़ाई, नहीं रखे जा रहे प्रोफेसर

शिमला – हिमाचल में उच्च शिक्षा में कैसे सुधार होगा, जब आगे-आगे दौड़ होगी और पीछे की व्यवस्थाएं वैसी की वैसी ही। प्रदेश के ऐसे जिलों में जहां युवाओं को पीजी डिग्री करने के लिए विषय तो शुरू कर दिए, लेकिन यूजी शिक्षकों के भरोसे ही पीजी के छात्रों को पढ़ाया जा रहा है। ऐसे में जहां कई कालेजों में यूजी के प्रोफेसर्ज पर कार्य का अतिरिक्त बोझ बड़ रहा है, वहीं छात्रों की भी पूरी कक्षाएं नहीं लग पा रही हैं। हैरत तो इस बात की है कि राज्य के लगभग 40 कालेजों में पीजी कोर्सेज शुरू किए गए हैं। इतने कालेजों में से एक भी संस्थान में स्पेशल पीजी की कक्षाएं पढ़ाने वाले योग्य शिक्षकों की तैनाती नहीं की गई है। हैरत है कि शिक्षा विभाग ने भी अभी तक सरकार को पीजी कोर्सेज के लिए छात्रों को पढ़ाने के लिए प्रोफेसर्ज के पद भरने को लेकर कोई भी प्रोपोजल नहीं भेजा है, जबकि कालेजों में यूजी डिग्री कर रहे छात्रों को भी सभी विषयों के शिक्षक नहीं मिल पाते हैं। विभागीय सूत्र बताते हैं कि जिन कालेजों में सरकार ने पीजी कोर्स शुरू किए भी हैं, वहां हर साल छात्रों के रिजल्ट का रेशो गिरता जा रहा है। कालेज में पीजी कोर्स करने के लिए छात्र दाखिला तो ले लेते हैं, लेकिन शिक्षक न होने की वजह से उन्हें अच्छे गाइड नहीं मिल पाते हैं। इस वजह से कालेज से पीजी कर रहे छात्रों की डिग्रियां केवल नाम की ही बनकर रह जाती हैं। गौर हो कि सरकार ने शिमला, सिरमौर, किन्नौर, कुल्लू जैसे जिलों में सबसे ज्यादा कालेजों को अपग्रेड कर यहां पीजी कक्षाएं शुरू की हैं। हांलाकि विभागीय सूत्र यह भी बताते हैं कि पीजी कोर्स शुरू करने का फैसला सरकार तभी लेती है, जब उन पर राजनीतिक दबाव व क्षेत्र के लोगों की ज्यादा मांग रहती है। सवाल यह है कि छात्रों की सुविधा के लिए जब कालेजों को अपग्रेड किया गया है, तो वहां शिक्षकों की भर्ती को लेकर सरकार विचार क्यों नहीं करती है। राज्य के लगभग 135 कालेजों में अभी तक 40 हजार से भी ज्यादा छात्र पढ़ते हैं। जानकारी मिली है कि  सरकारी कालेजों में 200 से ज्यादा शिक्षकों के भी पद खाली चले हुए हैं। यूजीसी के निर्देशों के बाद कालेजों में खाली पड़े यूजी शिक्षकोंं के पद भरने को लेकर तो शिक्षा विभाग ने कवायद तेज की है, बस इंतजार इस बात का है कि बिना किसी विचार-विमर्श से शुरू किए गए पीजी कोर्स में भी शिक्षकों की खलती कमी दूर हो सकें।

जरूरी है पीएचडी

स्नातकोत्तर छात्रों को पढ़ाने के लिए यूजीसी के निर्देशानुसार प्रोफेसर्ज को पीएचडी करना जरूरी बताया गया है। राज्य के कई ऐसे कालेज हैं, जहां पीजी छात्रों को पढ़ा रहे कई टीचर ऐसे भी हैं, जो बहुत पुराने हैं, और पीएचडी तक पूरी नहीं की है।

शिक्षक करें, तो क्या

जिन कालेजों में पीजी कोर्स चल रहे हैं, वहां के शिक्षक परेशान हैं कि वह रूसा का सिलेबस पूरा करवाएं या पीजी छात्रों की कक्षाओं में उन्हें पढ़ाएं। यह मामला बड़ा गंभीर होता जा रहा है, इस ओर सरकार व शिक्षा विभाग को मंथन की आवश्यकता है।

कोई भी प्रोपोज़ल तैयार नहीं

इस मामले पर अभी तक कोई भी प्रोपोजल शिक्षा विभाग की ओर से तैयार नहीं किया जा रहा। शिक्षा विभाग के अनुसार प्रदेश के कई ऐसे भी सरकारी कालेज हैं, जहां 13 से 14 विषयों पर पीजी डिग्रियां चलाई जा रही हैं, लेकिन शिक्षकों की अलग तैनाती नहीं की गई है। कालेजों में रूसा के तहत पहले से ही छात्रों को आठ विषय पढ़ाने का बोझ शिक्षकों पर है। अच्छे रिजल्ट न आने पर कार्रवाई डर भी शिक्षकों पर हर वक्त मंडराता है।

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