अब क्लीयर दिखेगा अपराधियों का चेहरा

शिमला – हिमाचल प्रदेश फोरेंसिक लैब जुन्गा में जल्द ही वीडियो एन्हांसमेंट सॉफ्टवेयर स्थापित होगा। वीडियो एन्हांसमेंट सॉफ्टवेयर की मदद से अपराधियों का चेहरा आसानी से देखा जा सकेगा। कुछ ऐसा ही वीडियो एन्हांसमेंट सॉफ्टवेयर फोरेंसिक लैब जुन्गा में स्थापित हो रहा है, जिसमें वीडियो एन्हांस करने की सुविधा मिलेगी और सॉफ्टवेयर में सीसीटीवी फुटेज की भी एनालिसिस की जा सकेगी। फोरेंसिक लैब जुन्गा में 20 लाख की लागत से स्थापित होने वाले वीडियो एन्हांसमेंट सॉफ्टवेयर की मदद से पुलिस के लिए भी आपराधिक वारदातें हल करना आसान होगा। इस सुविधा से चोरी, मर्डर व अन्य संगीन अपराधिक वारदातों के समय आई सीसीटीवी फुटेज की एनालिसिस की जा सकेगी। अगर वीडियो फुटेज में अपराधियों का चेहरा साफ  भी नहीं दिख रहा है, तो इस सॉफ्टवेयर से इन्हें आसानी से देखा जा सकेगा। मतलब पुलिस हर हाल में सीसीटीवी कैमरों में कैद अपराधियों तक पहुंच पाएगी। सीसीटीवी कैमरों में रिकार्ड हुई गाडि़यों के नंबर अगर साफ  भी नहीं है, तो भी इन्हें इस सॉफ्टवेयर से आसानी से रीड किया जा सकेगा। अकसर देखने में आया है कि कई बार आपराधिक वारदात में शामिल गाडि़यों के नंबर फुटेज में स्पष्ट नहीं आते। खासकर रात को गाडि़यों की प्लेट पर लाइट पड़ने से इन्हें पहचानना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में अपराधी वारदातों के बाद गाडि़यों से भागकर आसानी से बच निकलते हैं, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। अभी तक फोरेंसिक लैब जुन्गा में धुंधली वीडियो रीड करने की सुविधा नहीं है। इसके चलते ऐसी फुटेज को राज्य से बाहर जांच के लिए भेजना पड़ रहा है।

अब तक विदेश पर थे निर्भर

मनाली में कुछ समय पहले विदेशी महिला से रेप के मामले में आरोपियों की फुटेज पुलिस को अमरीका जांच के लिए भेजनी पड़ी थी। वहीं, हाल ही में बद्दी में सामने आए शूट आउट मामले में शामिल लोगों की फुटेज भी राज्य से बाहर जांच के लिए भेजनी पड़ी थी। ऐसे में अब आने वाले समय में जुन्गा फोरेंसिक लैब को हाईटेक सॉफ्टवेयर से लैस मशीन मिलेगी।

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