‘अलविदा चुनावी राजनीति’ तैयार

बाजार में जल्द आएगा शांता के प्रकाशित लेखों का संग्रह

पालमपुर – भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता व साहित्यकार शांता कुमार के विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित लेखों का संग्रह ‘अलविदा चुनावी राजनीति’  बाजार में आने को तैयार है। छह दशक की सक्रिय राजनीति के बाद इस वर्ष  चुनावी राजनीति को सम्मानजनक ढंग से अलविदा कहकर शांता कुमार ने राजनीति में स्वस्थ  परंपरा का आगाज किया है। संग्रह के पहले लेख ‘अलविदा चुनावी राजनीति’ के शीर्षक के आधार पर ही पुस्तक का शीर्षक रखा गया है। इस लेख में लेखक ने चुनावी राजनीति में विदाई के एहसास को पाठकों से साझा किया है। शांता कुमार कहते हैं कि उनके लिए चुनावी राजनीति की विदाई एक उत्सव है। चुनाव की राजनीति छोड़ते हुए उन्हें किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं हो रही। 1980 में जब दल-बदल के कारण त्याग पत्र दिया था, तो इसी प्रकार से प्रसन्न थे। मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ते हुए आंनद लिया था, तो चुनाव की राजनीति छोड़ते हुए किसी प्रकार की कोई परेशानी का प्रश्न ही पैदा नहीं होता। बकौल शांता कुमार अपने राजनीतिक जीवन में देश की विकट समस्याओं को करीब से  महसूस कर उनके निदान के लिए समय-समय पर राह सुझाई है। इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस जनसंख्या विस्फोट पर चिंता व्यक्त की है, शांता कुमार वर्षों से इस बढ़ती आबादी के प्रकोप से अपने लेखों के माध्यम से पाठकों को सचेत करते रहे हैं। संग्रह के संकलित 32 लेखों में से तीन लेख बढ़ती हुई जनसंख्या पर ही आधारित हैं, जिनमें शांता कुमार ने इस समस्या से निपटने के लिए महत्त्वपूर्ण सुझाव भी दिए हैं। अधिकांश योजनाओं में अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक कल्याण योजनाओं को पहुंचाने की  सदैव वकालत की है।

You might also like