अवैध खनन के चलते टापू बन गया पूरा गांव, शुक्कर खड्ड में उफान के चलते हुआ भारी कटाव

काले पानी की सजा काट रहा बल्ला

बिझड़ी -पिछले लगभग दस दिनों से समताना पंचायत के बल्ला गांव के 80 परिवार काला पानी का जीवन जीने पर मजबूर हैं। अवैध खनन और पिछले दिनों हुई भारी बारिश के चलते  शुक्कर खड्ड ने रौद्र रूप दिखाते हुए किनारे को तोड़ते हुए करीब 20 फुट तक अंदर आ चुकी है और लगातार भूमि कटाव हो रहा है। लोगों का कहना है कि लगातार अवैध खनन के चलते उनका गांव टापू बन गया है। अभी तक प्रशासन की तरफ  से पीडि़तों तक कोई भी राहत नहीं पहुंच सकी है। हालात यह हैं कि मुख्य सड़क तक पहुंचने का रास्ता पूरी तरह से तबाह हो चुका है। स्कूली बच्चों, बुजुर्ग व बीमार लोगों को आने-जाने में सबसे ज्यादा कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। हैरानी की बात यह है कि प्रशासन के ध्यान में मामला लाए जाने के बाद भी अभी तक मौके पर कोई सहायता नहीं पहुंच सकी है। प्रशासन के इस रवैए से खफा ग्रामीणों में भारी रोष पनप रहा है। बताते चलें कि वर्ष 2018 में भी इन गांव को पेश आ रही समस्याओं को मीडिया द्वारा प्रमुखता से उठाया गया था। उस समय लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के मुताबिक उक्त गांव को जोड़ने वाली कच्ची सड़क विभाग के अंतर्गत नहीं आती है। ऐसे में ग्रामीणों का प्रशासन से सवाल है कि वे अपनी समस्याओं को लेकर किसके पास जाएं। लोगों के मुताबिक खड्ड में किए जा रहे अवैध खनन से समस्या लगातार बढ़ती जा रही है, लेकिन शिकायतों के बावजूद संबंधित  विभाग व प्रशासन आंखें मींच कर सोया हुआ है। अपनी उपजाऊ जमीनों को बचाने व अवैध खनन पर लगाम लगाने के लिए स्थानीय पंचायत व ग्रामीणों का प्रतिनिधिमंडल कई बार  उपायुक्त हमीरपुर को भी ज्ञापन भी सौंप चुका है, जिस पर कार्रवाई करते हुए तत्कालीन एसडीएम बड़सर व खनन विभाग हमीरपुर के अधिकारी मौके पर पहुंचे थे। उस समय प्रशासन की तरफ  से गांवावसियों को आश्वासन दिया गया था कि आपकी समस्याओं को दूर करने के लिए एक कार्ययोजना बनाई जाएगी। अवैध खनन को रोकने के लिए नियमित खड्ड का निरीक्षण किया जाएगा, लेकिन गांववासियों का आरोप है कि मात्र आश्वासन के सिवाय आज तक उन्हें कुछ नहीं मिल सका है। ग्रामीणों में संजीव कुमार, सुनील, सन्नी, मनोज, प्रकाश चंद व राकेश कुमार का कहना है कि अगर हमारी समस्या को हल करने का प्रयास प्रशासन द्वारा नहीं किया गया तो मजबूरी में सभी ग्रामीण एकत्रित होकर धरना-प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे।

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