आईजीएमसी में दो मरीजों का किडनी ट्रांसप्लांट

ईद-उल-जुहा, सावन के अंतिम सोमवार पर पूरी हुई दस साल की दुआ

शिमला  – दस साल से इंतज़ार कर रहे आईजीएमसी की दुआ सोमवार को पूरी हो ही गई। एक तरफ ईद और दूसरी तरफ सावन के अंतिम सोमवार, ढेरों उम्मीदों के बीच प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट सफल हो गया है। छह घंटे में दो मरीजों का किडनी ट्रांसप्लांट किया गया। एक तरफ जहां सबसे ज्यादा दबाव आईजीएमसी के ऊपर था, वहीं उन किडनी प्रभावितों की भी अस्पताल में इन ट्रांसप्लांट्स को सफल करने की दुआएं भी शामिल थी। प्रदेश के किडनी प्रभावितों में मंडी के  38 वर्षीय बेटे के लिए उसकी मां भगवान साबित हुई। 55 वर्षीय मां ने 38 वर्षीय बेटे को किडनी दान की। वहीं, अन्य ट्रांसप्लांट में शिमला के रोहडू क्षेत्र से 68 वर्षीय पिता ने अपनी 31 वर्षीय बेटी को किडनी दान देकर उसका जीवन बचाया। बताया जा रहा है कि हिमाचल के पहले दो किडनी ट्रांसप्लांट लगभग दस वर्षों के लंबे इंतजार के बाद आईजीएमसी में सफल हो गए हैं। दोनों प्रभावितों की दोनों किडनियों में इन्फेक्शन था। सुबह आठ बजे एम्स से शिमला अस्पताल पहुंचे स्टाफ के बाद आईजीएमसी ने पहला किडनी ट्रांसप्लांट शुरू किया, जो तीन घंटे चला, वहीं दूसरे ट्रांसप्लांट को भी तीन घंटे ही लगे और दो प्रभावितों को दोपहर पांच बजे जीवनदान मिल गया। हालांकि अभी इन्हें अंडर ऑब्जर्वेशन रखा गया है, इन्हें अभी आईसीयू में शिफ्ट किया गया है, लेकिन टीम के मुताबिक दोनों प्र्रभावितों की हालत स्थिर है। दस वर्षों से इस योजना को सफल करने की जदोजहद आईजीएमसी कर रहा था, जिसमें लगभग इस योजना के तहत दो करोड़ अस्पताल में जगह नहीं मिलने की वजह से लैप्स भी हो गए थे, लेकिन अब 12 अगस्त को यह अहम प्रोजेक्ट सफल हो गया है।

…एम्स से पहुंची चार डाक्टरों की यह टीम

एम्स से आए डा. बीके बंसल, डा. कृष्णा, डा. आदित्य ने इस आपरेशन को सफल करने में आईजीएमसी का हाथ थामा है। वहीं, आईजीएमसी यूरोलॉजी से डा. पंपोश रैना, डा. गीरिश, डा. कैलाश और डा. मंजीत की टीम थी। नेफ्रोलॉजी में डा. संजय और अजय जरियाल के नाम शामिल हैं। बहरहाल अभी एम्स से दोबारा से टीम आईजीएमसी आएगी, जिसमें अन्य दो आपरेशन करने भी तय रखे गए हैं। इसके बाद आईजीएमसी के डाक्टर अपने स्तर पर ट्रांसप्लांट करेंगे।

अभी दस दिन केयर करेंगे डाक्टर

अभी आपरेशन पर एम्स के डाक्टर फुल चैक रखेंगे, जिसमें उसकी केयर दस दिन तक दिन-रात देखी जाएगी। मध्यम वर्ग से संबंध रखने वाले परिवारों का अभी आपरेशन प्रदेश सरकार के स्पेशल बजट से किया गया है, जिसमें 15 लाख का स्पेशल बजट आईजीएमसी को दिया गया था, लेकिन बाद में प्रदेश की अहम स्वास्थ्य योजना हिमकेयर के माध्यम से भी किडनी ट्रांसप्लांट हो पाएंगे।

प्रदेश के पहले दो ट्रांसप्लांट सफल हो गए हैं। सरकार के निर्देशों के तहत आईजीएमसी ने किडनी ट्रांसप्लांट करने पर काम किया था। अब जल्द ही आईजीएमसी के डाक्टर अपने स्तर पर ये आपरेशन कर पाएंगे

डा. जनक, एमएस, आईजीएमसी

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