आठ डॉक्टरों के झोले सील

दो महीने में शिमला-सिरमौर-कुल्लू-कांगड़ा और मंडी के नीम हकीमों की दवा दुकानें बंद

शिमला  – प्रदेश के आठ झोलाछाप डॉक्टरों की दवा दुकानें सील कर दी गई हैं। राज्य में दो महीने में यह कड़ी कार्रवाई अमल में लाई गई है, जिसमें शिमला में दो, सिरमौर में एक, कुल्लू में एक और कांगड़ा और मंडी में दो-दो दुकानें बंद की गई हैं। वहीं, सोलन में एक दवा दुकान भी सील कर दी गई है। जनता के स्वास्थ्य के साथ झोलाछाप डॉक्टर खिलवाड़ न करें, इसे लेकर उन पर नकेल कसी जा रही है, जिसमें हैल्थ सेफ्टी एंड रेगुलेशन डिपार्टमेंट गंभीरता से कदम उठा रहा है। प्रदेश के सभी जिलों में छापेमरी अभियान के तहत नियम के तहत काम नहीं करने वाले डॉक्टरों की खिंचाई की जा रही है। शिमला में पिछले सप्ताह ही बड़ी छापेमरी की गई है, जिसमें जुन्गा और बलदेहां में दो झोलाछाप डॉक्टरों की दुकानें सील कर दी गई हैं। मंगलवार को जुन्गा में यह कार्रवाई अमल में लाई गई थी और बुधवार को बलदेहां में झोलाछापे डॉक्टर की दुकान बंद की गई। पिछले सप्ताह ही गुरुवार को यह केस कोर्ट में पेश कर दिया गया है। प्रदेश में छापेमारी के दौरान संबंधित डॉक्टरों की दुकान से इंजेक्शन और ऐसी दवाएं मिली हैं, जो नियम के तहत डॉक्टरों के  पास नहीं मिलनी चाहिए। डॉक्टरों के पास लाइसेंस भी नहीं मिला है। इन दवा दुकानों में दवाआें का नाम सहित दस्तावेजों में रिकॉर्ड कर लिया गया है। प्रदेश के ड्रग इंस्पेक्टर के मुताबिक यह पूरी कोशिश की जा रही है कि सभी दुकानों पर नज़र रखी जाए। प्रदेश सरकार की ओर से ये निर्देश जारी किए जा रहे हैं कि जो दवा दुकानें चल रही हैं, वे सभी नियम के तहत काम करें, जिसे लेकर सभी जिला ड्रग इंस्पेक्टर दुकानों में छापेमारी कर रहे हैं। प्रदेश सरकार द्वारा भी ये निर्देश जारी किए गए हैं कि नियम के तहत दवा नहीं बेचने वालों पर कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाए, जिसके तहत प्रदेश के कोने-कोने में कड़े तौर पर नजर रखी जा रही है।

कइयों के पास फर्जी लाइसेंस

बताया जा रहा है कि कई झोलाछाप डॉक्टर ऐसे हैं, जिनके पास ये दवाएं बेचने के लिए लाइसेंस फर्जी है। फिलहाल जो दुकानें बंद की गई हैं, उसमें सभी डॉक्टर्स के  पास लाइसेंस नहीं मिल पाया है। पिछले वर्ष भी प्रदेश से 12 दवा दुकानों के लाइसेंस कैंसिल किए गए थे। इस वर्ष उन दुकानों पर कड़ी नज़र रखी जा रही है जो बंगाली डॉक्टर के नाम से मशहूर है और वह मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। अस्पतालों के डॉक्टर भी इस बात को मानते हैं कि इन नाम के डॉक्टर के पास मरीज इलाज के लिए फंस जाता है, जिससे उसकी हालत और बिगड़ जाती है।

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