एक ही दिन में बिकी 33 लाख की मछली

प्रतिबंध हटते ही प्रदेश के जलाशयों में कुल 22 मीट्रिक टन फिश प्रोडक्शन, आगे बढ़ने की उम्मीद

बिलासपुर – हिमाचल के जलाशयों में मत्स्य आखेट पर प्रतिबंध हटने के बाद पहले ही दिन लगभग 33 लाख रुपए का कारोबार हुआ है। इसमें 80 फीसदी मछुआरों को मिलेगा, जबकि शेष विभाग और मत्स्य सहकारी सभाओं की हिस्सेदारी है। सभी जलाशयों में कुल 22 मीट्रिक टन फिश प्रोडक्शन हुई है। इस बार क्लोज सीजन की अवधि पंद्रह दिन बढ़ाए जाने और जलाशयों में पानी लबालब भरा होने के चलते मछली की ब्रीडिंग सही हुई है। मत्स्य निदेशालय बिलासपुर में कार्यरत निदेशक सतपाल मेहता ने बताया कि मत्स्य आखेट पर प्रतिबंध हट गया है और गुरुवार शाम को ही मछुआरों ने जाल लगा दिए थे। पहले दिन पौंगडैम में सर्वाधिक 10 मीट्रिक टन और गोबिंदसागर जलाशय में 8.7 मीट्रिक टन मछली पकड़ी गई है। इसी प्रकार रणजीत सागर डैम में 3.2 मीट्रिक टन, चमेरा डैम में दो से तीन क्विंटल और कोलडैम में अढ़ाई क्विंटल मछली पकड़ी गई। उन्होंने बताया कि इस बार जलाशयों में पहले ही दिन 33 लाख रुपए का कारोबार किया गया है। इस बार जलाशयों में अवैध शिकार पर प्रतिबंध के तहत 190 केस पकड़े हैं और पौने दो लाख के करीब जुर्माना राशि वसूल की गई है। हालांकि गोविंदसागर में पिछले साल के मुकाबले इस बार पांच मीट्रिक टन  मछली कम पाई गई। गोबिंदसागर में 8.7 मीट्रिक टन मत्स्य उत्पादन हुआ है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 14 मीट्रिक टन था। गौर हो कि प्रदेश के जलाशयों में इस बार 65 लाख रुपए लागत का मछली बीज डाला जाएगा। इसके लिए टेंडर लगाए जा चुके हैं, जो 19 अगस्त को खुलेंगे

24 किलो की बिग हैड, 22 की कतला

मत्स्य विभाग बिलासपुर के सहायक निदेशक श्यामलाल ने बताया कि पहले दिन सिल्वर कार्प प्रजाति की बिग हैड नामक 24 किलोग्राम, जबकि 22 किलोग्राम की कतला प्रजाति की मछली भी जलाशय में पकड़ी गई है। उन्होंने बताया कि गोविंदसागर जलाशय में 34 मत्स्य सहकारी सभाएं कार्यरत हैं, जिनके माध्यम से सैंकड़ों मछुआरे मछली पकड़ते हैं। कोलडैम में चार मत्स्य सहकारी सभाएं कार्यरत हैं।

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