एचपीयू-क्लस्टर यूनिवर्सिटी के रूसा बजट पर संकट

शिमला – हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी व क्लस्टर विश्वविद्यालय के फेस टू के अप्रूव्ड बजट पर संकट मंडरा रहा है। हैरानी कि बात है कि भारत सरकार ने दोनों विश्वविद्यालयों के फेस वन के यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट (यूसी) पर कई आपत्तियां जताई हैं। सूत्रों की मानें तो एचपीयू व क्लस्टर विश्वविद्यालय ने भारत सरकार के निर्देशों के बाद रूसा के तहत पुराने बजट का यूसी तो भेज दिया, लेकिन उसमें से भी करोड़ों रुपए के बजट को एचपीयू धरातल पर खच नहीं कर पाया है। बताया जा रहा है कि अकेले एचपीयू का तीन से चार करोड़ रुपए का बजट यूसी में खर्च राशि में बताया गया है, लेकिन उसे एचपीयू खर्च नहीं कर पाया है। दरअसल एचपीयू में रूसा के तहत दूसरा ब्लॉक बनाने के लिए चार करोड़ की राशि दी गई थी, लेकिन यहां पर प्रशासन अभी तक कार्य शुरू नहीं कर पाया है। ऐसा ही कलस्टर विश्वविद्यालय का भी हाल है, यहां भी इस विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले कई कालेजों में कार्य चला हुआ है और कई ऐसे भी कालेज हैं, जिनका निर्माण कार्य शुरू ही नहीं हुआ है। ऐसे में पहले ही बजट को खर्च करने की जानकारी एमएचआरडी को दे दी है। विभागीय सूत्रों की मानें तो भारत सरकार ने दोनों ही विश्वविद्यालय के यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट पर आपत्ति जता दी है। पुख्ता सूत्र यह भी बता रहे हैं कि  भारत सरकार जल्द ही इस पर प्रदेश सरकार से जवाब तलब कर सकती है। वहीं फेस टू के तहत आने वाले बजट पर तलवार लटक सकती है। बता दें कि फेस वन के तहत भी एचपीयू व क्लस्टर को 20-20 करोड़ रुपए का पहला बजट दिया गया था। इसमें कोई हैरानी नहीं है कि हिमाचल के शिक्षण संस्थान अभी तक रूसा फेस वन का पूरा बजट खर्च नहीं कर पा रहे है। अधिकतर ऐसे कालेज हैं, जिन्होंने रूसा फेस वन का बजट खर्च नहीं किया है, और उन्हें एमएचआरडी ने भी फटकार लगाई थी। फिलहाल एचपीयू सहित कालेजों ने यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट भेज तो दिया, लेकिन अब केंद्र सरकार ने इस पर आपत्ति जतानी शुरू कर दी है। हालांकि फेस वन का पूरा बजट खर्च न होने के पीछे शिक्षा अधिकारियों का तर्क है कि पूरा बजट खर्च हो ही जाए, यह जरूरी तो नहीं है। केंद्र सरकार ने सीधे आदेश दिए थे कि रूसा का बजट समय-समय पर खर्च होना चाहिए, वहीं यह बजट कहां खर्च किया गया, इसका ब्यौरा भेजना भी जरूरी किया गया था, लेकिन एमएचआरडी के निर्देशों के बिल्कुल विपरित एचपीयू और क्लस्टर विश्वविद्यालय सहित कालेजों ने यूसी बनाकर भेजा है। फिलहाल एमएचआरडी के ये संकेत रूसा के तहत होने वाले विकास कार्यों के लिए ठीक नहीं हैं। गौर हो कि प्रदेश में रूसा थ्री अगले साल शुरू होने वाला है। ऐसे में केंद्र सरकार ने ही यह तय किया था कि  रूसा थ्री से फेस टू तक सभी कार्यों को पूरा करना है। इसके तहत सरकारी शिक्षण संस्थानों पुराना सारा बजट देने की योजना थी। अब जब दो विश्वविद्यालय सहित कई कालेजों के फेस-वन के खर्च ब्यौरे से एमएचआरडी संतुष्ट नहीं है, तो देखना होगा कि इसका क्या असर उच्च शिक्षा पर पड़ता है। 

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